₹1 करोड़ की सैलरी भी नहीं बनाएगी अमीर! जानें क्यों, एक्सपर्ट्स ने बताई वजह

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
₹1 करोड़ की सैलरी भी नहीं बनाएगी अमीर! जानें क्यों, एक्सपर्ट्स ने बताई वजह

सिर्फ ₹1 करोड़ की सालाना सैलरी होना ही आर्थिक सफलता की गारंटी नहीं है। कई प्रोफेशनल अपनी कमाई बढ़ने के साथ-साथ खर्च भी बढ़ा देते हैं, जिससे वे असल में वेल्थ (Wealth) नहीं बना पाते।

लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन का जाल

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स, जैसे कि Meenal Goel (जो Deloitte और KPMG जैसी बड़ी फर्मों में काम कर चुकी हैं), के अनुसार, ₹1 करोड़ की सालाना सैलरी होने के बावजूद कई लोग असल में वेल्थ बनाने में संघर्ष करते हैं। इसका मुख्य कारण है 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' (Lifestyle Inflation)। जैसे-जैसे कमाई बढ़ती है, लोगों का खर्च भी उसी रफ्तार से बढ़ जाता है। वे बड़े घर, महंगी कारें या गैर-ज़रूरी चीज़ों पर ज़्यादा खर्च करने लगते हैं। जब ये खर्चे कमाई के साथ बढ़ते हैं, तो बचत (Savings) या इन्वेस्टमेंट (Investment) के लिए बहुत कम बचता है।

डिसिप्लिन से वेल्थ कैसे बनाएं?

फाइनेंशियल फ्रीडम (Financial Freedom), यानी जब आपकी पैसिव इनकम (Passive Income) आपके बड़े खर्चों को पूरा करने के लिए काफी हो, यह सिर्फ बड़ी सैलरी पर निर्भर नहीं करता। यह लगातार फाइनेंशियल मैनेजमेंट का नतीजा है। फाइनेंशियल प्लानिंग मॉडल्स बताते हैं कि अगर आप डिसिप्लिन के साथ बचत करते हैं और मॉडरेट एनुअल इन्वेस्टमेंट रिटर्न्स (Annual Investment Returns) हासिल करते हैं, तो आप एक दशक में अच्छी-खासी वेल्थ बना सकते हैं। असली फोकस इस बात पर है कि इन्वेस्टमेंट ग्रोथ आपकी सैलरी ग्रोथ के बराबर या उससे ज़्यादा हो।

लॉन्ग-टर्म प्लानिंग की स्ट्रेटेजी

ज्यादातर इन्वेस्टर्स के लिए, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस (Financial Independence) का रास्ता खर्चों से पहले इन्वेस्टमेंट को प्राथमिकता देने से होकर गुजरता है। बिना किसी स्पष्ट एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) प्लान के सिर्फ हाई-पेइंग जॉब पर निर्भर रहने से व्यक्ति फाइनेंशियल स्ट्रेस में आ सकता है, खासकर अगर इनकम कम हो जाए या डेट ऑब्लिगेशन्स (Debt Obligations) बढ़ जाएं। वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) एक हाई-पेइंग जॉब का नतीजा नहीं, बल्कि समय के साथ जमा करने की प्रक्रिया है। अपनी सेविंग्स रेशियो (Savings Ratio) ट्रैक करना और फिक्स्ड कॉस्ट्स (Fixed Costs) को कंट्रोल करना लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने के सबसे कारगर तरीके हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.