असल में, रिटायरमेंट के बाद आपकी कमाई की सुरक्षा सिर्फ आपके पास कितना पैसा है, इस पर नहीं, बल्कि आप कितना निकाल रहे हैं और मार्केट की असलियत क्या है, इस पर टिकी होती है।
यह पूरा खेल उम्मीदों और हकीकत के बीच का है। जब कोई पोर्टफोलियो 8% सालाना ग्रोथ का लक्ष्य रखता है, लेकिन 6% की महंगाई का सामना करता है, तो असली रिटर्न (Real Return) सिर्फ 2% रह जाता है। ऐसे में, 12% की आक्रामक विद्ड्रॉल रेट आपके मूलधन (Principal) को असली रिटर्न से 6 गुना तेज़ी से खत्म कर देती है। यह ग्लोबल बेंचमार्क 3-5% से कहीं ज़्यादा है। और तो और, हर साल महंगाई के हिसाब से विद्ड्रॉल राशि बढ़ने से यह नुकसान और तेज़ हो जाता है।
आम तौर पर 8% का सालाना रिटर्न पाने के लिए लोग हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स का सहारा लेते हैं, जिनमें शेयर (Equity) और कर्ज (Debt) दोनों का मिश्रण होता है। लेकिन, ये फंड्स लगातार एक जैसा रिटर्न देने की गारंटी नहीं देते, और इनमें शेयर बाज़ार का उतार-चढ़ाव (Volatility) भी शामिल होता है। आजकल के मार्केट ट्रेंड्स में रिटायर होने वाले लोगों के लिए ज़्यादा शेयर बाज़ार में पैसा लगाने के बजाय, बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स (BAFs) जैसे डायवर्सिफाइड हाइब्रिड स्ट्रैटेजीज़ को ज़्यादा तरजीह दी जा रही है। ये फंड्स मार्केट की चाल के हिसाब से इक्विटी में अपने निवेश को मैनेज करते हैं। लगातार बनी रहने वाली महंगाई का मतलब है कि हर साल आपको अपनी लाइफस्टाइल को बनाए रखने के लिए ज़्यादा पैसे निकालने होंगे, जिससे आपके फंड पर दबाव और बढ़ जाता है। इसके अलावा, 'सीक्वेंस ऑफ रिटर्न्स रिस्क' (Sequence of Returns Risk) भी एक बड़ी चिंता है। इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में अगर मार्केट खराब रहा, तो आपके कॉर्पस की उम्र पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का बड़ा एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बताता है कि लोग इन प्रोडक्ट्स पर काफी भरोसा करते हैं, लेकिन शायद बहुत से निवेशक इन योजनाओं से जुड़े खतरों को पूरी तरह नहीं समझते।
लंबे समय के रिटायरमेंट प्लान के लिए एक जैसी मान्यताओं पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। पहले ही 12% विद्ड्रॉल रेट लेना तो साफ तौर पर टिकाऊ नहीं है, यह तो मूलधन को तेज़ी से खत्म करने जैसा है। भले ही 6% की रेट थोड़ी कम लगे, लेकिन इसके लिए भी ज़बरदस्त फाइनेंसियल डिसिप्लिन की ज़रूरत होगी और महंगाई के कारण लंबे समय में आपकी लाइफस्टाइल की उम्मीदें थोड़ी कम करनी पड़ सकती हैं। हाइब्रिड फंड्स के रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती, और पिछला प्रदर्शन भविष्य के नतीजों का संकेत नहीं देता। साथ ही, अगर टैक्स या स्कीमों से जुड़े कोई रेगुलेटरी बदलाव होते हैं, तो रिटर्न पर और असर पड़ सकता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग के भविष्य के लिए उम्मीदों को थोड़ा बदलना होगा। निवेशकों को 4-6% की रेंज में एक कंज़र्वेटिव (Conservative) विद्ड्रॉल स्ट्रेटेजी को अपनाना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) बनाए रखनी चाहिए। अपने पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा और एक इमरजेंसी फंड का होना बहुत ज़रूरी है। एनालिस्ट्स (Analysts) अक्सर रिटायर होने वालों के लिए कंज़र्वेटिव हाइब्रिड प्रोडक्ट्स की सलाह देते हैं, जो मूलधन की सुरक्षा के साथ-साथ ठीक-ठाक रिटर्न दे सकें, न कि ऐसे रिटर्न का पीछा करें जो अव्यावहारिक हों और मूलधन को खतरे में डाल दें।