Retirement Planning: क्या भारत में '4% विड्रॉल रूल' काम करेगा? रिटायरमेंट फंड सुरक्षित रखने का सही गणित समझें

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AuthorAditya Rao|Published at:
Retirement Planning: क्या भारत में '4% विड्रॉल रूल' काम करेगा? रिटायरमेंट फंड सुरक्षित रखने का सही गणित समझें

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अक्सर '4% विड्रॉल रूल' का इस्तेमाल होता है, लेकिन भारत में बढ़ती महंगाई और मार्केट के उतार-चढ़ाव इसे जोखिम भरा बना रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, **Rs 2 करोड़** के फंड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए **3%** से **3.5%** का विड्रॉल रेट ज्यादा बेहतर है।

बहुत से भारतीय रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अमेरिकी रिसर्च पर आधारित '4% विड्रॉल रूल' को अपनाते हैं। यह नियम कहता है कि अगर आप पहले साल अपने कुल कॉर्पस का 4% निकालते हैं और हर साल महंगाई के हिसाब से उसे एडजस्ट करते हैं, तो आपकी पूंजी लंबे समय तक चलेगी। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में इसे सीधे लागू करना जोखिम भरा हो सकता है।

भारत में महंगाई की हकीकत

भारत में महंगाई दर, खासकर हेल्थकेयर और रोजमर्रा के खर्चों में, विकसित देशों की तुलना में काफी ज्यादा और अस्थिर है। यदि आपके पास Rs 2 करोड़ का रिटायरमेंट फंड है, तो यह शुरुआत में पर्याप्त लग सकता है, लेकिन यह नियम यह नहीं बताता कि महंगाई कैसे आपकी परचेजिंग पावर को 20 साल में खत्म कर सकती है। यदि आप लगातार 4% हर साल निकालते हैं, तो महंगाई के दबाव में आपकी मूल पूंजी (Principal) उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से खत्म हो सकती है।

कॉर्पस की उम्र का गणित

जोखिम को समझना जरूरी है। अगर आपका फंड Rs 2 करोड़ है, तो 3% विड्रॉल रेट के हिसाब से आपको महीने का करीब Rs 50,000 मिलेगा। यह रकम कम लग सकती है, लेकिन यह आपकी पूंजी को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है। अगर आप विड्रॉल रेट को 6% करते हैं, तो आपको Rs 1 लाख मासिक तो मिलेगा, लेकिन आपका फंड सिर्फ 32 साल में खत्म हो सकता है। अगर विड्रॉल रेट 8% कर दिया जाए, तो यह अवधि घटकर सिर्फ 18 साल रह जाती है।

मार्केट रिस्क और पोर्टफोलियो

रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में अगर बाजार में गिरावट आती है, तो विड्रॉल जारी रखने से आप भारी नुकसान में शेयर बेचते हैं। इससे पोर्टफोलियो का रिकवर होना मुश्किल हो जाता है। बहुत से लोग सुरक्षित रहने के लिए केवल बैंक डिपॉजिट (FD) पर भरोसा करते हैं, लेकिन यह महंगाई को मात देने के लिए पर्याप्त नहीं है। एक संतुलित पोर्टफोलियो जरूरी है, जिसमें कुछ हिस्सा लिक्विड एसेट्स में हो और कुछ ग्रोथ-ओरिएंटेड इन्वेस्टमेंट्स में।

अंत में, रिटायरमेंट प्लानिंग को किसी एक 'नियम' में नहीं बांधा जा सकता। आपको पेंशन या रेंटल इनकम जैसे अलग-अलग जरियों पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि आप अपने मुख्य फंड पर कम निर्भर रहें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.