Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स अमाउंट का टारगेट रखना गलत है?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के लिए एक फिक्स अमाउंट का टारगेट रखना गलत है?

रिटायरमेंट के लिए सिर्फ एक फिक्स नंबर (Corpus) के पीछे भागना आपको सुरक्षा का झूठा अहसास दे सकता है। महंगाई और बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच, आपकी तैयारी मंथली कैश फ्लो की स्थिरता पर टिकी होनी चाहिए, न कि किसी एक स्थिर लक्ष्य पर।

ज्यादातर निवेशक रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत और अंत एक ही नंबर के साथ करते हैं—एक ऐसा टारगेट कॉर्पस जो जीवन भर चले। लेकिन एक ही 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' फिगर पर भरोसा करना एक बड़ी आर्थिक गलती हो सकती है। यह तरीका न तो महंगाई के असर को समझता है और न ही भविष्य के बदलते खर्चों को।

फिक्स टारगेट की समस्या

सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक स्थिर लक्ष्य क्रय शक्ति (Purchasing power) के कम होने को नजरअंदाज करता है। भारत में कंज्यूमर इन्फ्लेशन लगभग 4% के आसपास रहती है, ऐसे में आज के खर्चों को भविष्य के लिए बिना एडजस्ट किए देखना भविष्य में पैसों की कमी का कारण बन सकता है। मेडिकल खर्च भी आम महंगाई के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं। सिर्फ एक फिक्स अमाउंट के भरोसे रहना आपकी जमा-पूंजी के समय से पहले खत्म होने का बड़ा जोखिम पैदा करता है।

'एक्युमुलेशन' से 'कैश फ्लो' की ओर शिफ्ट

रिटायरमेंट की असली तैयारी इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने खर्चों और नियमित आय (Income stream) के बीच के अंतर को कैसे भरते हैं। निवेशक अक्सर पैसा जमा करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन वितरण (Distribution phase) को भूल जाते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) या रेंटल इनकम जैसे एसेट जरूरी तो हैं, लेकिन इनमें भी खालीपन का जोखिम और मेंटेनेंस का खर्चा जुड़ा होता है।

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने भी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में ड्रॉडाउन विकल्पों को बेहतर बनाने पर जोर दिया है, जो यह दर्शाता है कि अब एसेट के कुशल उपयोग पर ध्यान देना जरूरी है। निवेशकों को 'सेट इट एंड फॉरगेट इट' वाली मानसिकता से बाहर निकलकर कैपिटल ग्रोथ और सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाने की जरूरत है।

फ्लेक्सिबिलिटी है जरूरी

अपने खर्चों को अनिवार्य जीवन यापन के खर्चों और शौक के लिए होने वाले खर्चों में बांटें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि कम से कम कितनी मासिक आय की जरूरत है। सबसे सफल फाइनेंशियल प्लान डायनामिक होते हैं। वे महंगाई के अनुसार खुद को बदलते हैं और केवल कम ब्याज वाले सेविंग अकाउंट्स में फंड्स को लॉक करने की गलती नहीं करते। याद रखें, किसी एक हेडलाइन नंबर तक पहुंचना सफलता नहीं है, बल्कि बढ़ते खर्चों के सामने अपनी इनकम की सस्टेनेबिलिटी को ट्रैक करना ही असली कामयाबी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.