Leave Encashment पर टैक्स में छूट: इस्तीफा देने के बाद भी मिलेगा लाभ, जानें नियम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Leave Encashment पर टैक्स में छूट: इस्तीफा देने के बाद भी मिलेगा लाभ, जानें नियम

प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी अगर इस्तीफा भी देते हैं, तो उन्हें लीव एनकैशमेंट पर ₹25 लाख तक टैक्स छूट का हक है। कई कंपनियां इसे गलती से पूरी तरह टैक्सेबल मानती हैं, लेकिन आप ITR फाइल करते समय अपना रिफंड क्लेम कर सकते हैं।

नियम और कानून का सच

अक्सर सैलरीड एम्प्लॉइज के साथ यह समस्या आती है कि रिजाइन करते समय कंपनी लीव एनकैशमेंट को पूरी तरह टैक्सेबल मान लेती है, जिससे उनका TDS ज्यादा कट जाता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(10AA) के तहत, कर्मचारी इस छूट के हकदार हैं, चाहे वे रिटायर हो रहे हों या फिर इस्तीफा दे रहे हों।

क्यों होती है कन्फ्यूजन?

यह भ्रम 'रिटायरमेंट' शब्द की परिभाषा को लेकर है। मद्रास हाई कोर्ट के CIT vs R.J. Shahney और बॉम्बे हाई कोर्ट के CIT v. D.P. Malhotra जैसे फैसलों ने साफ कर दिया है कि एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई के रिश्ते का अंत होना ही रिटायरमेंट माना जाएगा। यानी, इस्तीफा देना भी टैक्स छूट के दायरे में आता है।

₹25 लाख की लिमिट का रखें ध्यान

प्राइवेट एम्प्लॉइज के लिए लीव एनकैशमेंट पर टैक्स छूट की लाइफटाइम लिमिट ₹25 लाख तय की गई है। अगर आप कई कंपनियों में काम कर चुके हैं, तो कुल मिलाकर यह छूट इससे ज्यादा नहीं हो सकती। ध्यान रहे, नौकरी के दौरान ली जाने वाली लीव एनकैशमेंट पूरी तरह टैक्सेबल होती है; यह छूट सिर्फ नौकरी छोड़ने के समय मिलने वाले सेटलमेंट पर मिलती है।

कटा हुआ TDS कैसे वापस पाएं?

अगर आपकी कंपनी ने बिना छूट दिए ज्यादा TDS काट लिया है, तो परेशान न हों। ITR फाइल करते समय आप उस राशि को 'एग्जेम्प्ट' (Exempt) के रूप में दिखाएं। इससे आपकी कुल टैक्स देनदारी कम हो जाएगी और आप रिफंड के लिए एलिजिबल हो जाएंगे। अगर टैक्स विभाग से कोई नोटिस आता है, तो अपने पास सर्विस रिकॉर्ड और कोर्ट के फैसलों की कॉपी जरूर रखें, ताकि आप अपना पक्ष मजबूती से रख सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.