ज्यादातर कर्मचारी पूरी तरह से कंपनी द्वारा दिए गए हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर रहते हैं, लेकिन नौकरी बदलते ही यह सुरक्षा खत्म हो जाती है। जानकारों का कहना है कि ग्रुप पॉलिसी के भरोसे रहना भविष्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
कंपनी द्वारा दिया जाने वाला हेल्थ इंश्योरेंस एक बड़ी सुविधा है, लेकिन इसे ही अपना एकमात्र 'सेफ्टी नेट' मानना एक बड़ी भूल हो सकती है। यह सुविधा केवल आपकी नौकरी के दौरान ही काम आती है, और नौकरी छूटते ही या कंपनी की पॉलिसी में बदलाव होते ही यह सुरक्षा तुरंत समाप्त हो जाती है।\n\n### क्यों खतरनाक है केवल ग्रुप पॉलिसी पर निर्भर रहना?\n\nसबसे बड़ा जोखिम 'निरंतरता' (Continuity) का है। यदि नौकरी के दौरान आपको कोई मेडिकल समस्या होती है और बाद में आप पर्सनल इंश्योरेंस लेने जाते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनियां उसे 'प्री-एक्जिस्टिंग डिजीज' (Pre-existing disease) मानकर प्रीमियम बढ़ा सकती हैं या वेटिंग पीरियड लगा सकती हैं।\n\nइसके अलावा, ग्रुप प्लांस अक्सर एक बड़ी वर्कफोर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं, जिससे वे आपकी व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से 'कस्टमाइज' नहीं होते। कई बार इनका 'सम इंश्योर्ड' (Sum Insured) इतना कम होता है कि गंभीर बीमारी के समय यह सारा पैसा तुरंत खत्म हो जाता है और बाकी का खर्च आपको अपनी सेविंग से देना पड़ता है।\n\n### पर्सनल इंश्योरेंस क्यों है जरूरी?\n\nएक स्टैंडअलोन पर्सनल हेल्थ पॉलिसी का सबसे बड़ा फायदा इसकी 'पोर्टेबिलिटी' है। यह आपके साथ रहती है, चाहे आप नौकरी बदलें, शहर बदलें या करियर में कोई ब्रेक लें।\n\nएक्सपर्ट्स की सलाह है कि कंपनी की पॉलिसी को केवल एक 'सप्लीमेंट्री' या अतिरिक्त कवर के रूप में देखें। आपकी वित्तीय सुरक्षा का मुख्य आधार एक स्वतंत्र (Independent) इंश्योरेंस प्लान होना चाहिए जिसे आप खुद नियंत्रित करें। यह एक छोटा सा कदम आपको और आपके परिवार को भविष्य के बड़े मेडिकल खर्चों और अनिश्चितताओं से बचा सकता है।
