Reddit User को ₹1.3 करोड़ की प्रॉपर्टी के लिए ₹20 लाख का लोन लेने की सलाह! जानिए क्या हैं खतरे?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Reddit User को ₹1.3 करोड़ की प्रॉपर्टी के लिए ₹20 लाख का लोन लेने की सलाह! जानिए क्या हैं खतरे?

हाल ही में Reddit पर एक यूजर ने बताया कि कैसे एक रिश्तेदार ने ₹1.3 करोड़ की प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के लिए ₹20 लाख का लोन लेने का प्रस्ताव दिया है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने इस तरह के इंतजामों में भारी जोखिमों की चेतावनी दी है, जिसमें क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर, टैक्स देनदारी और ₹1.1 करोड़ की फंडिंग गैप के लिए कानूनी जवाबदेही शामिल है।

क्या है पूरा मामला?

पर्सनल फाइनेंस फोरम पर हुई एक चर्चा में प्रॉक्सी लोन (Proxy Loan) के इंतजामों से जुड़े गंभीर जोखिमों को उजागर किया गया है। एक Reddit यूजर ने खुलासा किया कि उसके एक कज़िन (Cousin) का होम लोन एप्लीकेशन डॉक्यूमेंटेशन और KYC में गड़बड़ी के कारण रिजेक्ट हो गया था। इसके बाद कज़िन ने यूजर से ₹1.3 करोड़ की प्रॉपर्टी को अपने नाम पर रजिस्टर कराने के लिए ₹20 लाख का लोन लेने को कहा। कज़िन ने यह भी वादा किया कि वह EMI भरेगा और लोन चुकाने के बाद प्रॉपर्टी की ओनरशिप वापस ले लेगा।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: बड़े जोखिम!

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के इंतजाम में सारा कानूनी और फाइनेंशियल बोझ उसी व्यक्ति पर आता है जिसका नाम लोन और प्रॉपर्टी के कागजात पर होता है। अगर कज़िन EMI नहीं भर पाता है, तो पूरी जिम्मेदारी लोन लेने वाले पर आ जाएगी। इससे यूजर के क्रेडिट स्कोर (Credit Score) पर गंभीर और लंबे समय तक नकारात्मक असर पड़ सकता है, जो भविष्य में लोन लेने की उसकी क्षमता को प्रभावित करेगा।

टैक्स और कानूनी पचड़े

क्रेडिट जोखिम के अलावा, प्रॉपर्टी की फंडिंग को लेकर टैक्स (Tax) और कानूनी चिंताएं भी बड़ी हैं। प्रस्तावित ₹20 लाख का लोन ₹1.3 करोड़ की प्रॉपर्टी की कीमत का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। इससे ₹1.1 करोड़ का एक बड़ा अनअकाउंटेड फंडिंग गैप (Funding Gap) बचता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बाकी रकम के स्रोत का पारदर्शी होना बेहद ज़रूरी है। अगर फंड गलत तरीके से लाए गए या ट्रांजेक्शन ठीक से डॉक्यूमेंटेड नहीं हुआ, तो टैक्स अथॉरिटीज़ (Tax Authorities) की जांच शुरू हो सकती है। इसके अलावा, अगर कज़िन मौजूदा टैक्स कानूनों के तहत 'रिलेटिव' (Relative) की श्रेणी में नहीं आता, तो किसी भी फाइनेंशियल एक्सचेंज या प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर अप्रत्याशित टैक्स देनदारी और पेनल्टी लग सकती है।

कानूनी जानकारों का यह भी कहना है कि प्रॉपर्टी को अपने नाम पर रजिस्टर कराने से यूजर ही उसका लीगल ओनर (Legal Owner) बन जाता है। इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी से जुड़े सभी टैक्स, मेंटेनेंस और संभावित कानूनी विवादों की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। अगर प्रॉपर्टी टाइटल पर कोई विवाद होता है या रजिस्ट्रेशन में कोई समस्या आती है, तो प्रॉपर्टी के कागजात पर जिस व्यक्ति का नाम है, उसी को जोखिम उठाना पड़ेगा। फाइनेंशियल प्रोफेशनल्स की सलाह है कि बड़े प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन में पैसों के मामले में स्पष्ट सीमाएं बनाए रखना, अपनी पर्सनल फाइनेंशियल हेल्थ (Personal Financial Health) को सुरक्षित रखने और जटिल देनदारियों में फंसने से बचने के लिए बहुत ज़रूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.