निवेशक अब पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट से हटकर REITs और InvITs की ओर रुख कर रहे हैं। रेगुलर इनकम और बेहतर रिटर्न की चाहत रखने वाले लोगों के लिए यह एसेट क्लास एक नया विकल्प बनकर उभरा है, जिसमें सरकार की ओर से भी लगातार नए नियम पेश किए जा रहे हैं।
भारत के फाइनेंशियल मार्केट में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में ये न केवल बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं, बल्कि हाल ही में 2 नवंबर, 2026 को SEBI द्वारा लाए गए नए फ्रेमवर्क ने इनकी राह और आसान कर दी है। अब ये ट्रस्ट विदेशी निवेशकों के लिए डिपॉजिटरी रिसीट्स (DRs) जारी कर सकेंगे, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।
ये कैसे काम करते हैं?
इक्विटी के विपरीत, जो पूरी तरह बाजार की चाल पर निर्भर होती है, REITs और InvITs इनकम देने वाली संपत्तियों (Assets) से कमाई करते हैं। REITs मुख्य रूप से ऑफिस स्पेस और मॉल जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं, जबकि InvITs का ध्यान टोल रोड, पावर ग्रिड और गैस पाइपलाइन जैसे बुनियादी ढांचे पर होता है। नियम के मुताबिक, इन्हें अपने मुनाफे का कम से कम 90% हिस्सा निवेशकों (Unitholders) को बांटना अनिवार्य है, जो इसे एक स्टेबल इनकम का जरिया बनाता है।
RBI का नया कदम
सितंबर 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इन ट्रस्टों की वैल्यूएशन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों को अपनी होल्डिंग्स का मूल्यांकन करने में आसानी होगी, जिससे मार्केट में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिटेल निवेशकों के लिए डर कम होगा।
जोखिम को समझना भी है जरूरी
ये निवेश पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं हैं। सबसे बड़ा रिस्क 'इंटरेस्ट रेट' यानी ब्याज दरों का है। अगर मार्केट में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन ट्रस्टों पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है, जिससे मुनाफा कम हो सकता है। साथ ही, FD के विपरीत इनकी यूनिट्स की कीमतें शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का शिकार होती हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
सिर्फ डिविडेंड यील्ड देखकर निवेश न करें। REITs के लिए प्रॉपर्टी की ऑक्यूपेंसी रेट और InvITs के लिए इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी को समझना जरूरी है। साथ ही, सरकारी बॉन्ड और इन ट्रस्टों के बीच का यील्ड स्प्रेड, जो फिलहाल 150 बेसिस पॉइंट्स से कम है, उस पर भी नजर रखें ताकि आप सही फैसला ले सकें।
