रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के **1 जुलाई, 2026** से लागू नए आदेश के बाद क्रेडिट रिपोर्टिंग का पूरा गणित बदल गया है। अब लोन और रीपेमेंट की जानकारी हर हफ्ते क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जा रही है, जिससे आपके CIBIL स्कोर पर असर बहुत तेजी से पड़ रहा है।
भारत में पर्सनल फाइनेंस का पूरा लैंडस्केप अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे अब महीने में 4 निश्चित तारीखों—9, 16, 23 और महीने का आखिरी दिन—पर कर्जदारों का डेटा क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करें।
नए लोन का असर
जब आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक 'हार्ड इंक्वायरी' करते हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर क्रेडिट स्कोर में 5 से 10 अंक की अस्थायी गिरावट देखी जाती है। पहले यह जानकारी अपडेट होने में समय लगता था, लेकिन अब साप्ताहिक रिपोर्टिंग के कारण यह बदलाव आपके प्रोफाइल में तुरंत दिखने लगता है।
रीपेमेंट में देरी का रिस्क
अब क्रेडिट ब्यूरो के पास अपडेट बहुत तेजी से पहुँच रहे हैं। पहले EMI बाउंस होने या भुगतान में देरी का असर दिखने में हफ्तों का समय लगता था, लेकिन अब चंद दिनों में ही यह आपके रिकॉर्ड पर एक 'नेगेटिव मार्क' के रूप में दर्ज हो सकता है। ऐसे में समय पर भुगतान करना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है।
एक साथ कई लोन न लें
जो लोग थोड़े समय में कई लोन प्रोडक्ट्स के लिए अप्लाई करते हैं, उन्हें अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। लगातार होने वाली हार्ड इंक्वायरी से सिस्टम आपको 'क्रेडिट हंगरी' के रूप में मार्क कर सकता है, जिससे स्कोर तेजी से नीचे गिर सकता है।
अपना प्रोफाइल कैसे रखें सुरक्षित?
चूंकि रिपोर्टिंग अब तेज हो गई है, इसलिए अपने क्रेडिट स्कोर की नियमित निगरानी करना अनिवार्य हो गया है। अगर आप लोन बंद करते हैं, तो अब आपका स्कोर भी जल्दी सुधरेगा। अपनी EMI को समय पर चुकाएं और क्रेडिट लिमिट के इस्तेमाल को हमेशा कम रखें, क्योंकि स्कोर सुधारने के लिए ये आज भी सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर्स हैं।
