RBI ने फाइनेंशियल मिस-सेलिंग के खिलाफ कड़े नियम जारी किए हैं। जनवरी 2027 से 'डार्क पैटर्न' पर रोक लगेगी और संस्थानों को सेल्स प्रैक्टिस के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
भारत में फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स खरीदने वाले निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने मिस-सेलिंग को जड़ से खत्म करने के लिए एक सख्त फ्रेमवर्क तैयार किया है। ये नियम 31 दिसंबर, 2026 तक लागू करने होंगे और 1 जनवरी, 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
अब संस्थानों की सीधी जवाबदेही
नए नियमों के तहत, वित्तीय संस्थान अपने स्टाफ, एजेंटों और इन्फ्लुएंसर्स के गलत कामों के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे। यदि किसी ग्राहक को गलत जानकारी देकर कोई प्रोडक्ट बेचा जाता है, तो बैंक या संस्थान को न केवल रिफंड देना होगा, बल्कि हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। अब किसी भी सेल से पहले 'सूटेबिलिटी असेसमेंट' (Suitability Assessment) अनिवार्य होगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रोडक्ट ग्राहक के रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से सही है।
डार्क पैटर्न और बंडलिंग पर पाबंदी
डिजिटल युग में ग्राहकों को लुभाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 'डार्क पैटर्न' (manipulative digital designs) पर आधिकारिक रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, लोन एग्रीमेंट के साथ जबरन इंश्योरेंस या अन्य प्रोडक्ट्स की बंडलिंग (forced bundling) को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है, जो अब तक रिटेल कर्जदारों के लिए बड़ी समस्या रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
हालांकि ये नियम 2027 से लागू होंगे, लेकिन निवेशकों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है। सेबी (SEBI) और इरडा (IRDAI) ने स्पष्ट किया है कि केवल वही वादे मान्य होंगे जो पॉलिसी डॉक्यूमेंट या लिखित एग्रीमेंट में दर्ज हैं। किसी भी एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले 'फाइन प्रिंट' को ध्यान से पढ़ें।
यदि आप मिस-सेलिंग का शिकार होते हैं, तो हर बातचीत और सेल्स रिप्रेजेंटेटिव के रिकॉर्ड रखें। विवाद होने पर आप बीमा संबंधी शिकायतों के लिए 'बीमा भरोसा' और सिक्योरिटीज बाजार के लिए 'SCORES' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, पॉलिसी में मिलने वाले 'फ्री-लुक पीरियड' (Free-look period) का उपयोग करना न भूलें, जो गलत प्रोडक्ट मिलने पर बाहर निकलने का सबसे बड़ा हथियार है।
