डिजिटल फ्रॉड से बचाएं अपनी दौलत! ऐसे रखें सेफ अपना इन्वेस्टमेंट कैपिटल

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AuthorNeha Patil|Published at:
डिजिटल फ्रॉड से बचाएं अपनी दौलत! ऐसे रखें सेफ अपना इन्वेस्टमेंट कैपिटल

डिजिटल दुनिया में अपने इन्वेस्टमेंट को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है। अपने बैंक अकाउंट की डिटेल्स, UPI ट्रांजैक्शन और ऑफिशियल प्रोसीजर को वेरिफाई करके आप फ्रॉड से बच सकते हैं।

कैपिटल को फ्रॉड से कैसे बचाएं?

किसी भी इन्वेस्टर के लिए, दौलत बनाने का पहला कदम बैंक में रखे हुए पैसे को सुरक्षित करना है। मार्केट की वोलेटिलिटी (volatility) भले ही एक जाना-पहचाना रिस्क हो, लेकिन फाइनेंशियल फ्रॉड से बचा जा सकता है। आजकल के साइबर स्कैम (cyber-scam) अक्सर सीधे ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म से जुड़े बैंक अकाउंट्स को टारगेट करते हैं। ऐसे में, सभी मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए डिजिटल हाइजीन (digital hygiene) को प्राथमिकता देना ज़रूरी है।

अकाउंट की सुरक्षा के गेटways

फ्रॉड का सबसे आम तरीका है क्रेडेंशियल्स (credentials) का लीक होना। कभी भी अपना पिन (PIN), ओटीपी (OTP) या सीवीवी (CVV) नंबर किसी के साथ शेयर न करें। यह एक बहुत ज़रूरी नियम है: बैंक और ब्रोकरेज सपोर्ट टीम कभी भी टेक्निकल प्रॉब्लम को ठीक करने या रिफंड प्रोसेस करने के लिए आपका पिन या ओटीपी नहीं मांगेगी। अगर कोई कॉल पर ये डिटेल्स मांगता है, तो समझ लीजिए कि यह एक स्कैम है।

UPI ट्रांजैक्शन के रिस्क

कई इन्वेस्टर ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि UPI ऐप में 'कलेक्ट' रिक्वेस्ट (collect request) का मतलब आने वाला पेमेंट नहीं है। यह आपसे पैसे भेजने का एक अनुरोध है। अपना पिन डालने से पहले हमेशा रिसीवर का नाम और अमाउंट वेरिफाई करें। अपनी स्क्रीन पर इन डिटेल्स को कन्फर्म करने से आपके बैंक अकाउंट से अनधिकृत कटौती को रोका जा सकता है।

हमेशा ऑफिशियल चैनल्स का करें इस्तेमाल

अपने बैंक या ब्रोकर के साथ किसी भी इशू के लिए, हमेशा ऑफिशियल मोबाइल ऐप या अपने डेबिट कार्ड के पीछे दिए गए कस्टमर केयर नंबर या ऑफिशियल वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें। कस्टमर केयर नंबर के लिए इंटरनेट पर सर्च करने से फ्रॉड करने वालों द्वारा मैनेज किए गए नकली लिस्टिंग में फंसने का खतरा होता है। कभी भी स्क्रीन-शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें या किसी अनजान कॉलर के कहने पर अपने डिवाइस का रिमोट एक्सेस (remote access) न दें।

तुरंत एक्शन लें

अगर कोई फ्रॉड ट्रांजैक्शन होता है, तो समय बहुत कीमती है। अपने अकाउंट में होने वाले हर मूवमेंट पर नज़र रखने के लिए SMS और ईमेल के ज़रिए ट्रांजैक्शन अलर्ट (transaction alert) ज़रूर चालू करें। अगर आपको कोई संदिग्ध चार्ज दिखता है, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके अकाउंट ब्लॉक करवाएं। भारत में, आप नेशनल हेल्पलाइन 1930 पर या ऑफिशियल सरकारी साइबरक्राइम पोर्टल (cybercrime portal) पर भी फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट कर सकते हैं। अपने अकाउंट का नियमित ऑडिट करना, जैसे कि इनएक्टिव (inactive) UPI IDs को डीएक्टिवेट करना और बंद पड़े अकाउंट्स को क्लोज करना, संभावित हमलों के खतरे को और कम करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.