2 साल से पहले प्रॉपर्टी बेचना पड़ा महंगा, टैक्स का बोझ बढ़ा!

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AuthorNeha Patil|Published at:
2 साल से पहले प्रॉपर्टी बेचना पड़ा महंगा, टैक्स का बोझ बढ़ा!

अगर आपने हाल ही में कोई प्रॉपर्टी खरीदी है और उसे 24 महीने के अंदर बेचने का मन बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। ऐसा करने पर आपको शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (Short-term Capital Gains Tax) देना पड़ सकता है, जिसकी गणना आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से होती है। यह लॉन्ग-टर्म प्रॉपर्टी बिक्री पर मिलने वाली सेक्शन 54 छूट के दायरे में भी नहीं आता।

टैक्स स्लैब का असर: 24 महीने से पहले बेचने पर क्या होता है?

जब आप कोई रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदते हैं और उसे 24 महीने या उससे कम समय के लिए रखते हैं, तो उस पर होने वाले मुनाफे को आपकी रेगुलर इनकम माना जाता है। यानी, इस प्रॉफिट को आपकी सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और फिर उसी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिसमें आप आते हैं।

अगर आप हाई इनकम ब्रैकेट में हैं, तो यह टैक्स 30% तक जा सकता है! यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Long-term Capital Gains) से काफी अलग है, जहां टैक्स की दरें 12.5% जैसी फिक्स्ड और कम होती हैं। इसलिए, अगर आप दो साल की अवधि के करीब हैं, तो कुछ महीने और प्रॉपर्टी होल्ड करने से आपको टैक्स में काफी बचत हो सकती है।

सेक्शन 54 छूट का झमेला

आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के सेक्शन 54 के तहत मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं। कई प्रॉपर्टी ओनर्स सोचते हैं कि प्रॉपर्टी बेचकर मिले पैसे को दूसरी रेजिडेंशियल यूनिट में इन्वेस्ट करने पर कैपिटल गेन टैक्स से बचा जा सकता है।

लेकिन, यह सुविधा सिर्फ लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन के लिए ही है। अगर आपने प्रॉपर्टी 24 महीने से कम समय के लिए रखी है, तो आप इस छूट का फायदा नहीं उठा सकते। भले ही आपने तुरंत नई प्रॉपर्टी खरीद ली हो, शॉर्ट-टर्म बिक्री से हुए पूरे मुनाफे पर टैक्स लगेगा।

सही कैलकुलेशन क्यों जरूरी है?

ज़्यादा टैक्स देने से बचने के लिए, अपने प्रॉफिट का सही हिसाब लगाना बहुत ज़रूरी है। आपको पूरी बिक्री की रकम पर नहीं, बल्कि सिर्फ हुए मुनाफे पर टैक्स देना होता है। इसके लिए, प्रॉपर्टी की खरीद कीमत को बिक्री मूल्य से घटाएं।

इसके अलावा, प्रॉपर्टी की खरीद या बिक्री से जुड़े खर्चों जैसे ब्रोकरेज फीस (Brokerage Fees), स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट (Registration Costs) को भी आप मुनाफे से घटा सकते हैं। टैक्स फाइलिंग के समय इन खर्चों के रिकॉर्ड को संभाल कर रखना बेहद अहम है।

प्रॉपर्टी डील फाइनल करने से पहले, ओनर्स को अपनी प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की सही तारीख जरूर जांच लेनी चाहिए ताकि होल्डिंग पीरियड का सटीक कैलकुलेशन हो सके। अगर आप दो साल की समय सीमा के करीब हैं, तो खरीद समझौते (Purchase Agreement) और बिक्री रजिस्ट्री की तारीख की जांच करना, अपनी टैक्स देनदारी समझने का एक आसान लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.