नया फाइनेंशियल ईयर शुरू हो चुका है और बाज़ार में फिक्स्ड इनकम निवेश (Fixed Income Investments) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखने के बाद, फिक्स्ड डिपॉज़िट्स (FDs) के बाज़ार में ज़्यादा बड़े उतार-चढ़ाव की उम्मीद कम है। ऐसे में, पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉज़िट्स (TDs) लंबी अवधि के लिए बैंकों के फिक्स्ड डिपॉज़िट्स (FDs) से बेहतर रिटर्न दे रही हैं।
फिलहाल, पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉज़िट्स पर 6.90% (1 साल), 7.00% (2 साल), 7.10% (3 साल) और सबसे लंबी अवधि यानी 5 साल के लिए 7.50% का ब्याज मिल रहा है। यह दरें कई बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSUs) और कुछ प्राइवेट बैंकों से काफी ज़्यादा हैं। उदाहरण के लिए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अपने 5-साल की FD पर आम ग्राहकों को केवल 6.05% ब्याज दे रहा है, जबकि एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) इसी अवधि के लिए 6.15% की दर दे रहा है।
सबसे बड़ा फायदा यह है कि पोस्ट ऑफिस की ये डिपॉज़िट्स भारत सरकार द्वारा समर्थित (Government Backed) हैं, जो इन्हें ज़ीरो रिस्क वाला निवेश बनाती हैं। खासकर, ग्लोबल अनिश्चितताओं के इस दौर में यह सुरक्षा बहुत मायने रखती है।
हालांकि, बैंकों की फिक्स्ड डिपॉज़िट्स की अपनी अलग खूबियां हैं। बैंक एक विस्तृत रेंज में डिपॉज़िट अवधि (कुछ हफ्तों से लेकर 10 साल तक) की सुविधा देते हैं। साथ ही, डिपॉज़िट पर लोन लेना या मैच्योरिटी से पहले कुछ शर्तों के साथ पैसा निकालना आसान होता है। बैंकों में अक्सर सीनियर सिटीज़न्स (Senior Citizens) के लिए ब्याज दरें ज़्यादा होती हैं, जो पोस्ट ऑफिस की TDs में उपलब्ध नहीं है। जैसे, SBI सीनियर सिटीज़न्स को 5-साल की FD पर 7.05% तक का ब्याज दे सकता है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सीनियर सिटीज़न सेविंग्स स्कीम (SCSS) 8.2%, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) 7.7% और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) 7.1% जैसे अन्य सरकारी बचत विकल्प भी मौजूद हैं। 5-साल की पोस्ट ऑफिस TD इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट के लिए भी योग्य है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI के दरों को स्थिर रखने और महंगाई (Inflation) पर नियंत्रण के चलते फिक्स्ड इनकम के लिए यह दौर स्थिर रहने वाला है। इक्विटी मार्केट की अस्थिरता (Volatility) और बेहतर विकल्पों की कमी (जिसे TINA Effect भी कहते हैं) के चलते, निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में, लंबी अवधि के लिए कैपिटल प्रिजर्वेशन (Capital Preservation) और बेहतर रिटर्न चाहने वाले रिटेल निवेशकों के लिए, पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉज़िट्स सरकारी गारंटी और आकर्षक ब्याज दरों के संगम के कारण एक मज़बूत विकल्प बनी हुई हैं।