₹1.05 करोड़ में जल्दी रिटायरमेंट? 32 साल की निवेशक के प्लान पर एक्सपर्ट्स का 'Reality Check'

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
₹1.05 करोड़ में जल्दी रिटायरमेंट? 32 साल की निवेशक के प्लान पर एक्सपर्ट्स का 'Reality Check'

चेन्नई की एक 32 वर्षीय निवेशक ने ₹1.05 करोड़ का पोर्टफोलियो बना लिया है और 40-42 साल की उम्र तक रिटायर होने का सपना देख रही है। हालांकि, वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि इतनी जल्दी रिटायरमेंट के लिए केवल एक निश्चित रकम जमा करना ही काफी नहीं है।

जल्दी रिटायरमेंट की चुनौती

आम तौर पर लोग 60 साल की उम्र में रिटायर होकर अगले 20 साल के खर्चे का अनुमान लगाते हैं। लेकिन 40 की उम्र में रिटायर होने का मतलब है कि आपके पोर्टफोलियो को अगले 40 साल या उससे भी ज़्यादा समय तक सहारा देना होगा। इसे 'कॉर्पस एडिक्वेसी' (Corpus Adequacy) कहते हैं, यानी आराम से जीवन जीने के लिए कुल कितनी रकम की ज़रूरत है।

वित्तीय योजनाकार 'सेफ विथड्रॉअल रेट' (Safe Withdrawal Rate) का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय बाज़ार के हिसाब से, अगर आप अपने कुल पोर्टफोलियो का 3% से 3.5% सालाना से ज़्यादा निकालते हैं, तो पैसे खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है। यह ख़ासकर तब ज़्यादा होता है जब आपका पैसा इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) दोनों में लगा हो।

₹1.05 करोड़ का 'मैजिक नंबर' काफी है?

ज़्यादा बचत दर होने के बावजूद, जल्दी रिटायरमेंट प्लान पर तीन बड़े खतरे मंडरा सकते हैं:

  1. महंगाई (Inflation): समय के साथ पैसे की कीमत घट जाती है। आज ₹50,000 में जो चीज़ें आती हैं, 2040 में उनकी कीमत कहीं ज़्यादा होगी।
  2. मेडिकल महंगाई: भारत में हेल्थकेयर का खर्च अक्सर आम महंगाई से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है। जल्दी रिटायरमेंट प्लान में अक्सर मेडिकल इमरजेंसी फंड को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जबकि यह बहुत ज़रूरी है।
  3. सीक्वेंस ऑफ रिटर्न्स रिस्क (Sequence of Returns Risk): रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में अगर शेयर बाज़ार अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है, तो पैसे निकालने से पोर्टफोलियो की ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में, जल्दी रिटायर होने वाले व्यक्ति के लिए यह बहुत बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि उनके पास कमाई का कोई दूसरा ज़रिया नहीं होता।

सही वित्तीय योजना क्या है?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जल्दी रिटायरमेंट का लक्ष्य रखने वालों को सिर्फ़ एक सेविंग्स गोल से आगे सोचना चाहिए। एक मज़बूत प्लान में आज के हिसाब से रिटायरमेंट के बाद के सालाना खर्चों का अनुमान लगाना, महंगाई को ध्यान में रखना और हेल्थकेयर के लिए अलग से फंड रखना शामिल होना चाहिए। निवेशकों को सिर्फ़ ग्रोथ के लिए नहीं, बल्कि बाज़ार में गिरावट के समय स्थिरता के लिए भी अपने एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) को देखना चाहिए। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पोर्टफोलियो कई दशकों तक लगातार महंगाई को मात देने वाली इनकम जेनरेट कर सकता है, सिर्फ़ एक निश्चित रकम तक पहुंचना ही काफी नहीं होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.