बढ़ती महंगाई के दौर में सिर्फ बचत काफी नहीं है। एक्सपर्ट्स बच्चों की पढ़ाई के लिए Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) की सुरक्षा के साथ Equity SIPs के ग्रोथ का बैलेंस बनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि लक्ष्य पूरा हो सके।
भारत में उच्च शिक्षा की लागत तेजी से बढ़ रही है। शिक्षा के क्षेत्र में महंगाई दर 8% से 12% सालाना के बीच चल रही है, जिसका मतलब है कि जो कोर्स आज ₹30 लाख का है, वह 15 साल बाद ₹80 लाख से भी महंगा हो सकता है। इस अंतर को पाटने के लिए एक्सपर्ट्स सरकारी योजनाओं की सुरक्षा और शेयर बाजार के ग्रोथ पोटेंशियल के मिश्रण की सलाह देते हैं।
SSY: एक स्टेबल आधार
Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) बच्चियों की शिक्षा के लिए एक बेहतरीन आधार है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही के अनुसार, इस पर 8.2% का ब्याज मिल रहा है। इसमें मिलने वाली EEE टैक्स छूट इसे और आकर्षक बनाती है। हालांकि, इसमें ₹1.5 लाख की अधिकतम वार्षिक निवेश सीमा और लंबी लॉक-इन अवधि जैसी चुनौतियां हैं, इसलिए इसे एकमात्र निवेश नहीं माना जा सकता।
क्यों जरूरी है Equity SIP?
महंगाई को मात देने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में SIP करना जरूरी है। लंबे समय में इक्विटी ने हमेशा डेट से बेहतर रिटर्न दिया है। कंपाउंडिंग की ताकत आपके कॉर्पस को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है, जो सिर्फ ब्याज आधारित स्कीमों में संभव नहीं है।
लक्ष्य के पास जोखिम को कैसे घटाएं?
शिक्षा का लक्ष्य करीब आने पर इक्विटी बाजार का जोखिम बढ़ जाता है। यदि एडमिशन के समय बाजार गिर जाए, तो बड़ा नुकसान हो सकता है। इसे 'सीक्वेंस-ऑफ-रिटर्न रिस्क' कहते हैं। इससे बचने के लिए कॉलेज जाने से 3 से 5 साल पहले फंड्स को लिक्विड फंड, डेट फंड या बैंक डिपॉजिट्स जैसे सुरक्षित विकल्पों में शिफ्ट कर देना चाहिए।
विदेशी शिक्षा के लिए खास रणनीति
विदेश में पढ़ने का प्लान है, तो करेंसी फ्लक्चुएशन का ध्यान रखना जरूरी है। भारतीय रुपये के मुकाबले डॉलर या पाउंड के महंगे होने से शिक्षा का खर्च और बढ़ सकता है। इसके लिए पोर्टफोलियो में ग्लोबल म्यूचुअल फंड्स या गोल्ड को शामिल करना एक अच्छा हेज (Hedge) साबित हो सकता है।
