इमरजेंसी फंड: 3-6 महीने का नियम छोड़ें, अपनी ज़रूरत के हिसाब से बनाएं 'सुरक्षा कवच'

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AuthorAditya Rao|Published at:
इमरजेंसी फंड: 3-6 महीने का नियम छोड़ें, अपनी ज़रूरत के हिसाब से बनाएं 'सुरक्षा कवच'

अब बड़े फाइनेंस एक्सपर्ट्स (Financial Experts) की सलाह है कि इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) के लिए 3 से 6 महीने के खर्चों का फिक्स्ड रूल फॉलो करने के बजाय, अपनी हाउसहोल्ड की असल ज़रूरतों के हिसाब से इसे कस्टमाइज़ (Customize) करें। अपने नॉन-नेगोशिएबल (Non-negotiable) मंथली खर्चों और इनकम की स्टेबिलिटी पर ध्यान देकर आप नौकरी जाने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी मुश्किल घड़ी के लिए ज़्यादा असरदार सेफ्टी नेट (Safety Net) बना सकते हैं।

खर्च पर करें ज़्यादा फोकस, इनकम पर नहीं

आमतौर पर लोग अपनी मंथली सैलरी (Monthly Salary) के आधार पर इमरजेंसी फंड का साइज़ तय करते हैं, लेकिन यह एक आम गलती है। फाइनेंस एडवाइजर्स (Finance Advisors) ज़ोर देकर कहते हैं कि इस फंड को असल ज़रूरी खर्चों के आधार पर कैलकुलेट किया जाना चाहिए। इसमें होम लोन ईएमआई (Home Loan EMI), किराया, बिजली-पानी के बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम, स्कूल फीस और बेसिक ग्रोसरी का खर्च शामिल है। जब आपकी इनकम में रुकावट आती है, तब भी ये खर्चे बने रहते हैं। इसलिए, यह ज़रूरी है कि आपका सेफ्टी नेट आपकी कमाई से ज़्यादा, आपके घर चलाने के असल खर्चों के हिसाब से हो।

आपकी सिचुएशन के हिसाब से कस्टमाइज़ेशन

सेफ्टी नेट का साइज़ आपकी पर्सनल सिचुएशन पर बहुत निर्भर करता है। अगर किसी घर में दो लोग कमा रहे हैं, तो शायद उन्हें कम पैसे की ज़रूरत पड़े, जबकि सिंगल-अर्नर फैमिली को ज़्यादा की। इसी तरह, सेल्फ-एम्प्लॉयड (Self-employed) लोगों या ज़्यादा अनिश्चितता वाले सेक्टर में काम करने वालों को अपनी इनकम में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए ज़्यादा पैसे की ज़रूरत होती है। इसके अलावा, अगर घर में बच्चे या बुजुर्ग हैं जिनकी देखभाल और पढ़ाई का खर्चा है, तो ऐसी फैमिलीज को अप्रत्याशित घटनाओं से निपटने के लिए एक बड़े और मज़बूत बफर (Buffer) की ज़रूरत होती है।

इन्वेस्टमेंट रिटर्न से ज़्यादा ज़रूरी है लिक्विडिटी

हमेशा ज़्यादा रिटर्न (Returns) पाने की चाहत रहती है, लेकिन इमरजेंसी फंड के मामले में फंड की अवेलेबिलिटी (Availability) सबसे पहले आती है। इस पैसे का मुख्य मकसद किसी भी मुश्किल वक्त में तुरंत पैसा मुहैया कराना है, जैसे अचानक कोई मेडिकल खर्चा आ जाए या नौकरी चली जाए। इसलिए, इन पैसों को सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) या लिक्विड म्यूचुअल फंड (Liquid Mutual Funds) जैसी आसानी से एक्सेस होने वाली जगहों पर रखना बेहतर होता है, भले ही वहां रिटर्न थोड़ा कम मिले। इन्हें लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट (Long-term Investments) में फंसाना ठीक नहीं है, क्योंकि ज़रूरत पड़ने पर ये शायद तुरंत उपलब्ध न हों।

धीरे-धीरे फंड बनाएं

कई लोगों के लिए, खासकर युवा प्रोफेशनल्स (Young Professionals) जो कई फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) और ज़्यादा लोन के बीच बैलेंस बना रहे हैं, कई महीनों के खर्चों के बराबर फंड जमा करना मुश्किल लग सकता है। फाइनेंस एक्सपर्ट्स (Finance Experts) का सुझाव है कि इमरजेंसी फंड को एक रेगुलर मंथली कमिटमेंट (Recurring Monthly Commitment) की तरह देखें, जैसे कोई बिल भरते हैं। हर पे-साइकल (Pay cycle) पर एक फिक्स्ड अमाउंट साइड में रखकर, लोग अपने डेली बजट पर ज़्यादा स्ट्रेस डाले बिना धीरे-धीरे एक बड़ा सेफ्टी नेट बना सकते हैं। इस फंड का असली फायदा यह है कि जब ज़िंदगी आपके प्लान से हटकर चलती है, तो यह आपको वह फाइनेंशियल स्पेस (Financial Space) देता है, जिससे आप हाई-इंटरेस्ट वाले पर्सनल लोन (High-interest Personal Loans) या लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को जल्दी निकालने की नौबत से बच पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.