निवेशकों में अक्सर यह गलतफहमी होती है कि PPF जैसे Section 80C वाले निवेश इक्विटी पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को कम कर सकते हैं। हकीकत यह है कि इनकम टैक्स नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, हालांकि बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट का इस्तेमाल करके कुछ राहत मिल सकती है।
भारत में कई निवेशक यह मानकर चलते हैं कि PPF या अन्य टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स का उपयोग करके वे शेयर बाजार से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर टैक्स घटा सकते हैं। लेकिन इनकम टैक्स के मौजूदा नियमों के अनुसार, ऐसा संभव नहीं है। Section 80C के तहत मिलने वाली छूट का सीधा संबंध आपकी रेगुलर इनकम से होता है, न कि कैपिटल गेन्स से।
80C की कटौती क्यों काम नहीं आती?
Income Tax Act का Section 80C आपको अपनी टैक्सेबल इनकम घटाने की सुविधा देता है, लेकिन इक्विटी से होने वाले लॉन्ग टर्म गेन्स पर टैक्स एक अलग ढांचे (Section 112A) के तहत लगता है। वर्तमान में, 1.25 लाख रुपये से अधिक के लाभ पर 12.5% की दर से टैक्स देना होता है। चूंकि यह एक अलग टैक्स कैलकुलेशन है, इसलिए 80C के निवेश यहाँ कोई राहत नहीं पहुँचाते।
बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट का फायदा
अगर आपकी रेगुलर इनकम बेसिक टैक्स-फ्री लिमिट से कम है, तो आप उस बची हुई लिमिट का उपयोग अपने कैपिटल गेन्स को एडजस्ट करने के लिए कर सकते हैं। यह सुविधा केवल 'रेजिडेंट इंडिविजुअल्स' के लिए है। उदाहरण के तौर पर, यदि आपकी कुल आय बेसिक छूट सीमा से कम है, तो आप उस अंतर का लाभ उठाकर अपने कैपिटल गेन्स पर लगने वाले टैक्स को कम कर सकते हैं।
गलतियों से बचें, भारी पड़ सकता है जुर्माना
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने टैक्स फाइलिंग में इन दोनों को अलग-अलग रखें। अगर आप गलत धारणा के साथ ITR फाइल करते हैं, तो टैक्स कम जमा होने की स्थिति में आप पर ब्याज और भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा, गलत जानकारी देने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की स्क्रूटनी का सामना भी करना पड़ सकता है। अपनी टैक्स प्लानिंग के लिए हमेशा किसी क्वालिफाइड प्रोफेशनल की सलाह लेना बेहतर होता है।
