PFRDA ने NPS को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए एक नए डिजिटल मॉडल का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य भारत की विशाल कामकाजी आबादी को रिटायरमेंट सेविंग्स के दायरे में लाना है, जिससे पेंशन फंड्स का एसेट बेस बढ़ सकता है।
डिजिटल क्रांति की ओर कदम
Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) ने 2 सितंबर 2026 को एक ड्राफ्ट जारी किया है, जो नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के वितरण के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। अब तक NPS के लिए फिजिकल ब्रांच और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब रेगुलेटर इसे पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी में है।
क्या बदलेगा?
वर्तमान में 'Points of Presence' के जरिए ही सब्सक्राइबर्स जुड़ पाते हैं, जिनमें फिजिकल ऑफिस का होना अनिवार्य है। नए प्रस्ताव के तहत, केवल डिजिटल माध्यम से काम करने वाले 'Point of Presence' को मंजूरी दी जाएगी। ये डिजिटल एंटिटी ग्राहकों की ऑनबोर्डिंग और कॉन्ट्रिब्यूशन को टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स के जरिए हैंडल कर सकेंगी, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर्स का खर्च कम होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
देश में रिटायरमेंट सेविंग्स की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। ड्राफ्ट के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत में 61.6 करोड़ कामकाजी लोग थे, जबकि NPS सब्सक्राइबर्स की संख्या मात्र 2.3 करोड़ के आसपास है। PFRDA अब LLP, को-ऑपरेटिव सोसाइटीज और ट्रस्ट जैसे संस्थानों को भी डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर बनने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है।
सख्ती और निगरानी जारी
हालांकि डिजिटल मॉडल में एंट्री आसान होगी, लेकिन PFRDA की निगरानी पहले की तरह सख्त रहेगी। डिजिटल डिस्ट्रीब्यूटर्स को गवर्नेंस, टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटी और रेगुलेटरी मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। फिलहाल यह प्रस्ताव कंसल्टेशन स्टेज में है और इस पर 2 अक्टूबर 2026 तक फीडबैक दिया जा सकता है। निवेशकों के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया फ्रेमवर्क पेंशन सिस्टम में फंड्स के इनफ्लो को कितनी तेजी से बढ़ाता है।
