रिटायरमेंट के बाद प्रोविडेंट फंड (PF) की रकम को बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखने वाले निवेशकों के लिए एक ज़रूरी खबर है। PF से निकाली गई रकम भले ही टैक्स-फ्री हो, लेकिन FD में जमा करने के बाद उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल (Taxable) होगा। ऐसे में, फाइनेंशियल प्लानर्स सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स जैसी सरकारी स्कीम्स पर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं, जो टैक्स के लिहाज़ से ज़्यादा फायदेमंद हो सकती हैं।
FD पर मिलने वाले ब्याज का सच
ज़्यादातर रिटायर लोग अपनी PF की मैच्योर हुई रकम को बैंक FD में सुरक्षित निवेश मानते हैं और रेगुलर इनकम का जरिया भी। लेकिन, एक आम गलतफहमी यह है कि PF की रकम टैक्स-फ्री होने का मतलब है कि उस पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री होगा। ऐसा बिल्कुल नहीं है। जैसे ही आप यह पैसा बैंक FD में डालते हैं, उस पर मिलने वाले ब्याज को बैंक आपकी इनकम मानता है और यह आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्सेबल होता है। खासतौर पर सीनियर सिटीजन्स के लिए, जो अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए इसी ब्याज पर निर्भर करते हैं, यह टैक्स देनदारी उनकी उम्मीद से काफी कम कैश हाथ में आने का कारण बन सकती है।
कैपिटल बचाने के लिए सरकारी विकल्प
बैंक FD पर लगने वाले टैक्स के बोझ को देखते हुए, कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सरकारी स्मॉल सेविंग स्कीम्स को बेहतर विकल्प बता रहे हैं। इनमें से एक लोकप्रिय स्कीम है सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)। यह स्कीम खासतौर पर सीनियर सिटीजन्स के लिए ही बनाई गई है, जिसमें आप ₹30 लाख तक निवेश कर सकते हैं। फिलहाल, इस पर 8.2% की ब्याज दर मिल रही है, जिसका भुगतान तिमाही आधार पर होता है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत SCSS में किए गए निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा भी मिल सकता है, जिससे कुल टैक्स देनदारी को मैनेज करने में मदद मिलती है।
एक और ज़रूरी विकल्प है RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड्स। इन बॉन्ड्स की लॉक-इन पीरियड 7 साल की होती है और इन्हें सेंट्रल गवर्नमेंट का सपोर्ट हासिल है, जो इन्हें एक लो-रिस्क (Low-Risk) ऑप्शन बनाता है। इन बॉन्ड्स पर ब्याज दर फिक्स नहीं होती, बल्कि यह नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) रेट से जुड़ी होती है, जिसमें 0.35% का स्प्रेड (Spread) जुड़ता है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, इन बॉन्ड्स पर 7.15% यील्ड (Yield) मिल रही है, और ब्याज का भुगतान छमाही आधार पर होता है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
रिटायरमेंट के बाद की इनकम की प्लानिंग करते समय, निवेशकों को FD पर मिलने वाले पोस्ट-टैक्स रिटर्न (Post-Tax Returns) और सरकारी स्कीम्स से मिलने वाले इंटरेस्ट के बीच के अंतर पर नज़र रखनी चाहिए। जहां बैंक FD आसानी से पैसा निकालने की सुविधा देती है, वहीं सरकारी स्कीमें अक्सर बेहतर टैक्स ट्रीटमेंट या कम्पेटिटिव यील्ड्स (Competitive Yields) ऑफर करती हैं। कोई भी फैसला लेने से पहले, निवेशकों को अपने इनकम टैक्स स्लैब, इन स्कीम्स की लॉक-इन पीरियड्स और अपनी पर्सनल लिक्विडिटी (Liquidity) की ज़रूरतों को ज़रूर जांच लेना चाहिए। इन फैक्टर्स की रेगुलर समीक्षा करने से यह सुनिश्चित होता है कि आपका रिटायरमेंट कॉर्पस (Corpus) बिना किसी अनचाहे टैक्स सरप्राइज के लगातार अच्छा परफॉर्म करता रहे।
