Income-tax Act, 2025 के लागू होने के साथ, अब Hindu Undivided Families (HUFs) के लिए New Tax Regime डिफॉल्ट हो गई है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए परिवारों को अब यह तय करना होगा कि वे कम स्लैब दरों के साथ आगे बढ़ें या पुराने टैक्स डिडक्शन का लाभ लेने के लिए पुरानी व्यवस्था को चुनें।
1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हुए Income-tax Act, 2025 ने Hindu Undivided Families (HUFs) के लिए टैक्स प्लानिंग के पूरे गणित को बदल दिया है। अब असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 'New Tax Regime' ही डिफॉल्ट विकल्प है, जिसने 1961 के पुराने नियमों की जगह ले ली है।
डिडक्शन का पेच (The Deduction Trade-Off)
कर्ता (Karta) के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोअर टैक्स स्लैब और टैक्स-सेविंग बेनिफिट्स के बीच के संतुलन की है। नई व्यवस्था में Section 80C और Section 80D जैसे पारंपरिक डिडक्शन का लाभ नहीं मिलता है। कई परिवारों के लिए पुरानी व्यवस्था (Old Regime) में मिलने वाली ये छूटें, नई व्यवस्था की कम दरों के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं। इसलिए, पुराने विकल्प को चुनना अब एक सक्रिय और सोच-समझकर लिया गया फैसला होना चाहिए, न कि डिफॉल्ट मोड पर छोड़ देना।
बिजनेस इनकम और कंप्लायंस (Compliance Requirements)
अगर HUF बिजनेस या प्रोफेशनल एक्टिविटीज से कमाई कर रहा है, तो नियम और भी सख्त हैं। यदि आप पुरानी व्यवस्था के तहत डिडक्शन बरकरार रखना चाहते हैं, तो आपको समय पर Form 10-IEA फाइल करना अनिवार्य है। Section 139(1) के तहत अगर यह फॉर्म समय पर नहीं भरा गया, तो टैक्स अथॉरिटी ऑटोमैटिकली आपके रिटर्न को 'New Tax Regime' के दायरे में डाल देंगी, जिससे आप अपनी टैक्स एफिशिएंसी खो सकते हैं।
एसेट और लॉस मैनेजमेंट
नए फ्रेमवर्क में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान (Losses) को अन्य इनकम सोर्सेज के साथ एडजस्ट करने पर पाबंदियां हैं। रियल एस्टेट और रेंटल इनकम वाले HUFs के लिए यह बदलाव काफी बड़ा है। चूंकि HUFs को इंडिविजुअल टैक्सपेयर की तरह समान टैक्स रिबेट्स नहीं मिलते, इसलिए कर्ता को दोनों व्यवस्थाओं का तुलनात्मक कैलकुलेशन करना ही होगा।
साफ है कि इस साल टैक्स प्लानिंग के लिए पहले से इनकम, डिडक्शन और लॉस का प्रोजेक्शन करना सबसे बेहतर तरीका है। जल्दबाजी से बचने के लिए अभी से अपने पिछले साल के रिकॉर्ड्स को नए स्लैब स्ट्रक्चर के साथ कंपेयर करना शुरू कर दें।
