विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRIs) को मोबाइल नंबर बंद होने के कारण बैंकिंग ट्रांजैक्शन में दिक्कतें आ रही हैं। FEMA के नियमों के मुताबिक, रेजिडेंट सेविंग्स अकाउंट को NRE/NRO में बदलना जरूरी है, वरना भारी जुर्माना लग सकता है।
बहुत से नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए घरेलू फाइनेंशियल सिस्टम से जुड़े रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या भारतीय मोबाइल नंबर का निष्क्रिय होना है। ये नंबर बैंकिंग और स्टॉक मार्केट ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी OTP पाने का मुख्य जरिया हैं। अगर मोबाइल नंबर बंद हो जाता है, तो विदेश से अपने भारतीय एसेट्स को मैनेज करना लगभग असंभव हो जाता है और इसे दोबारा चालू करने के लिए अक्सर भारत आने तक की नौबत आ जाती है।
FEMA नियमों का रखें खास ख्याल
मोबाइल कनेक्टिविटी से बड़ी समस्या FEMA (Foreign Exchange Management Act) के अनुपालन की है। कई NRI विदेश जाने के बाद भी अपने पुराने रेजिडेंट सेविंग्स अकाउंट का इस्तेमाल जारी रखते हैं, जो नियमों के खिलाफ है। जैसे ही आप NRI का दर्जा प्राप्त करते हैं, आपको अपना अकाउंट NRE या NRO स्टेटस में कन्वर्ट कराना होता है। ऐसा न करने पर बैंक अकाउंट फ्रीज किया जा सकता है और उल्लंघन के मामले में निवेश राशि का 3 गुना तक जुर्माना या ₹2,00,000 का फिक्स्ड फाइन लग सकता है।
निवेशकों के लिए राहत की खबरें
रेगुलेटर्स ने निवेशकों के लिए नियमों में ढील दी है:
- निवेश सीमा बढ़ी: जून 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने NRIs और OCI के लिए भारतीय लिस्टेड कंपनियों में व्यक्तिगत निवेश सीमा को 10% और एग्रीगेट लिमिट को 24% कर दिया है।
- आसान होगा KYC: 14 अगस्त 2026 को SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें पूरी तरह से डिजिटल और रिमोट KYC की प्रक्रिया का प्रस्ताव है। अगर यह लागू होता है, तो NRI को आइडेंटिटी वेरिफिकेशन के लिए भारत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अपनी बैंकिंग सुरक्षा के लिए सलाह यही है कि बैंक रिकॉर्ड में अपना विदेशी मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट करवाएं और सुनिश्चित करें कि आपका बैंक NRE/NRO अकाउंट के साथ इंटरनेशनल नंबर रजिस्टर करने की सुविधा देता है।
