अब नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) अपने माता-पिता के लिए भरे गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 126 के तहत टैक्स छूट (Tax Deduction) का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनना होगा, क्योंकि नए डिफ़ॉल्ट टैक्स स्ट्रक्चर में यह छूट उपलब्ध नहीं है।
माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स छूट
नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए अपने माता-पिता के स्वास्थ्य खर्चों को कवर करते हुए टैक्स देनदारियों को मैनेज करना अब आसान हो गया है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के नए सेक्शन 126 के तहत, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू वित्तीय वर्ष से प्रभावी है, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट के नियमों को सरल बनाया गया है।
छूट की सीमा और उम्र
यह टैक्स छूट NRIs को अपने माता-पिता के लिए भरे गए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर क्लेम करने की अनुमति देती है, चाहे उनके माता-पिता भारत में रहते हों या नहीं। छूट की राशि माता-पिता की उम्र पर निर्भर करती है। यदि माता-पिता की उम्र 60 साल से कम है, तो ₹25,000 तक की छूट मिल सकती है। वहीं, अगर माता-पिता 60 साल या उससे अधिक के हैं, तो यह सीमा बढ़कर ₹50,000 तक हो जाती है। यह राशि टैक्सपेयर द्वारा अपने परिवार के लिए क्लेम की जाने वाली किसी भी अन्य हेल्थ इंश्योरेंस छूट के अतिरिक्त है।
लाभ के लिए ज़रूरी शर्तें
NRIs को इन टैक्स छूटों का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होगा। सबसे महत्वपूर्ण शर्त टैक्स रिजीम का चुनाव है। सेक्शन 126 के तहत मिलने वाली यह छूट केवल उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए उपलब्ध है जो अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) को चुनते हैं। जो लोग डिफ़ॉल्ट रूप से नए टैक्स रिजीम को चुनेंगे, वे इस छूट का दावा नहीं कर पाएंगे।
एक और अहम शर्त यह है कि इंश्योरेंस पॉलिसी भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा अनुमोदित होनी चाहिए। भारत के बाहर की इंश्योरेंस कंपनियों को दिए गए प्रीमियम पर यह छूट लागू नहीं होगी। इसके अलावा, प्रीमियम का भुगतान नॉन-कैश मोड जैसे नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या चेक के माध्यम से किया जाना चाहिए।
टैक्सपेयर्स के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
NRIs के लिए सबसे बड़ी चुनौती उचित दस्तावेज़ीकरण बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रक्रियाओं को समझना है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि इंश्योरेंस पॉलिसी IRDAI-विनियमित इकाई से खरीदी गई हो, ताकि टैक्स असेसमेंट के दौरान क्लेम रिजेक्ट न हो। इसके अतिरिक्त, दूर से इंश्योरेंस खरीदते समय मिस-सेलिंग से सावधान रहना चाहिए। इंश्योरर से सत्यापित दस्तावेज़ प्राप्त करना और स्वीकृत बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित करना अनुपालन बनाए रखने में मदद कर सकता है। चूंकि टैक्स नियम बदल सकते हैं, इसलिए सटीक टैक्स प्लानिंग के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से संबंधित सर्कुलर पर नज़र रखना उचित है।
