भारत में कमाई करने वाले NRIs पर रेंटल और NRO इंटरेस्ट पर **30%** का भारी-भरकम TDS कटता है। अब आप लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट या इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करके अपना फंसा हुआ पैसा आसानी से वापस पा सकते हैं।
TDS का बोझ और समस्या
भारत में निवेश करने वाले NRIs के लिए रेंटल इनकम और NRO अकाउंट से मिलने वाले ब्याज पर 30% का फिक्स TDS कटता है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 393 के तहत, चाहे ट्रांजेक्शन की राशि कितनी भी कम क्यों न हो, यह कटौती लागू होती है। रेजिडेंट्स के मुकाबले NRIs को यहां कोई बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट का फायदा नहीं मिलता, जिससे कैश फ्लो पर सीधा असर पड़ता है।
लोअर डिडक्शन सर्टिफिकेट का रास्ता
इस बड़ी कटौती से बचने का एक कारगर तरीका है—सेक्शन 395 के तहत 'लोअर या निल डिडक्शन सर्टिफिकेट' (Lower or Nil Deduction Certificate) के लिए आवेदन करना। यदि आप इनकम टैक्स अथॉरिटीज के पास सही तरीके से आवेदन करते हैं, तो आपका TDS रेट घटकर 0.10% तक भी हो सकता है। हालांकि, इसमें थोड़ा प्रशासनिक काम और समय लगता है, इसलिए आवेदन से पहले संभावित टैक्स बचत और प्रक्रिया के खर्च का आकलन जरूर कर लें।
ITR फाइल कर पाएं रिफंड
यदि आपकी कुल सालाना टैक्सेबल इनकम भारत की बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट से कम है, तो 30% TDS कटने का मतलब है कि आपका एक्स्ट्रा टैक्स सरकार के पास जमा हो रहा है। ऐसे मामलों में, ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना सबसे बेहतर विकल्प है। ITR फाइल करने के बाद, जब आपकी टैक्स लायबिलिटी का मिलान हो जाएगा, तो अथॉरिटीज आपके क्लेम को वेरीफाई करके एक्स्ट्रा कटा हुआ पैसा वापस आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर देंगी।
