NRI Capital Shift: जमा छोड़ 'रिस्क' वाले निवेश में NRIs, क्या है वजह?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NRI Capital Shift: जमा छोड़ 'रिस्क' वाले निवेश में NRIs, क्या है वजह?
Overview

NRI (Non-Resident Indians) अब अपना पैसा पारंपरिक जमा योजनाओं (Deposit Schemes) से निकालकर रियल एस्टेट और ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) जैसे ज्यादा जोखिम वाले, लेकिन ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में लगा रहे हैं। यह दिखाता है कि NRI निवेशक अब सिर्फ सुरक्षित निवेश नहीं, बल्कि 'अल्फा' (Alpha) की तलाश में हैं।

NRI निवेशकों का बदलता मिजाज

भारत में विदेशों से भेजे जाने वाले कुल पैसे (Remittances) में भले ही उछाल दिख रहा हो, लेकिन NRI के निवेश के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। रिपोर्टें बता रही हैं कि NRI अब पारंपरिक जमा योजनाओं (NRI Deposit Schemes) में कम पैसा लगा रहे हैं। अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान इन योजनाओं में 26.56% की भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल के $12.55 बिलियन के मुकाबले घटकर सिर्फ $9.2 बिलियन रह गया है। यह दिखाता है कि NRI निवेशक अब फिक्स्ड इनकम से आगे बढ़कर ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स की तलाश में हैं जो उन्हें बेहतर ग्रोथ दे सकें, भले ही उनमें थोड़ा ज्यादा जोखिम हो।

रियल एस्टेट और AIFs की बढ़ती धूम

इस पैसे का बड़ा हिस्सा रियल एस्टेट सेक्टर की ओर जा रहा है। 2019 में जहां केवल 10% NRI प्रॉपर्टी खरीद रहे थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 20% तक पहुंच गया है। इसमें रेसिडेंशियल और कमर्शियल प्रॉपर्टीज के साथ-साथ रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) भी शामिल हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे शहर NRI के बीच काफी पॉपुलर हैं। खास बात यह है कि ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में भी NRI का निवेश 29.8% बढ़कर दिसंबर 2025 तक लगभग $2.7 बिलियन तक पहुंच गया है।

'कैटेगरी III' AIFs बने पहली पसंद

AIFs के अंदर, 'कैटेगरी III' फंड्स ने सबसे ज्यादा रफ्तार पकड़ी है। इनमें 47% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है और अब ये कुल NRI AIF निवेश का 53% हिस्सा हैं। ये फंड्स हेज फंड्स (Hedge Funds) की तरह काम करते हैं और इनमें लिवरेज (Leverage) व डेरिवेटिव्स (Derivatives) का इस्तेमाल करके 'अल्फा' कमाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इनमें बाजार की तेज उठापटक, लिवरेज से घाटा बढ़ने और लॉक-इन पीरियड की वजह से लिक्विडिटी की कमी जैसे बड़े जोखिम भी शामिल हैं। इन फंड्स में मिनिमम इन्वेस्टमेंट ₹1 करोड़ है, जो सिर्फ हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (High-Net-Worth Individuals) के लिए ही मुमकिन है।

GIFT City: निवेश का नया हब

NRI अब GIFT City के जरिए निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज हब 15% के कम कॉर्पोरेट टैक्स रेट (10 साल के लिए), कुछ सिक्योरिटीज पर कैपिटल गेन टैक्स में छूट और कई ट्रांजेक्शन कॉस्ट पर GST से छूट जैसे फायदे देता है। अप्रैल 2026 से, म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) और ETFs भी बिना कैपिटल गेन टैक्स के यहां शिफ्ट हो सकेंगे, जिससे NRI के लिए निवेश के विकल्प और भी खुल जाएंगे। GIFT City में फॉरेन करेंसी का इस्तेमाल होता है, जो प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट को रुपये की अस्थिरता से बचाता है।

जोखिमों पर भी एक नज़र

ज्यादा रिटर्न की चाहत में NRI जब जमा योजनाओं को छोड़कर रियल एस्टेट और AIFs जैसे ज्यादा जोखिम वाले इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगा रहे हैं, तो इसके कुछ खतरे भी हैं। 'कैटेगरी III' AIFs में लिवरेज और कॉम्प्लेक्स स्ट्रैटेजीज के कारण बाजार में गिरावट आने पर भारी नुकसान का जोखिम रहता है। करेंसी में उतार-चढ़ाव भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि 2026 में USD/INR 90-93 के बीच रह सकता है। इसके अलावा, AIFs और GIFT City के रेगुलेटरी नियमों में बदलाव या रियल एस्टेट मार्केट में करेक्शन भी निवेश पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, भारत की GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है और महंगाई RBI के टारगेट के आसपास रहने की उम्मीद है, जो एक सपोर्टिव मैक्रो एनवायरनमेंट (Macro Environment) का संकेत है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताएं और ट्रेड पॉलिसी में बदलाव भी चिंता बढ़ा सकते हैं।

आगे का नज़ारा

NRI की ओर से अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई (Diversify) करने का यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है। Sophisticated निवेश वाहनों (Sophisticated investment vehicles) को अपनाना और GIFT City का बढ़ता आकर्षण यह दिखाता है कि NRI निवेशकों की सोच बदल रही है। वे अब सिर्फ 'सेफ' नहीं, बल्कि 'स्मार्ट' और 'रिटर्न-ओरिएंटेड' निवेश की तलाश में हैं, जो आने वाले समय में भारत के फाइनेंशियल मार्केट्स और रियल एस्टेट सेक्टर पर बड़ा असर डालेगा।

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