PFRDA ने NPS Vatsalya स्कीम में बड़ा बदलाव किया है। अब दादा-दादी, रिश्तेदार और दोस्त भी नाबालिग के खाते में पैसा जमा कर सकेंगे। हालांकि, खाते का पूरा कंट्रोल माता-पिता या कानूनी अभिभावकों के पास ही रहेगा। इस स्कीम में सालाना सिर्फ **₹250** से निवेश की शुरुआत की जा सकती है।
अब अपनों का साथ, बच्चे का भविष्य सुरक्षित
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS Vatsalya स्कीम के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए अब परिवार के अन्य सदस्यों को भी निवेश का मौका दिया है। 23 फरवरी, 2026 से प्रभावी इन नए नियमों के तहत, दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य रिश्तेदार भी नाबालिग के PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) में स्वैच्छिक योगदान (Gift Contribution) कर सकेंगे।
कौन करेगा खाते को कंट्रोल?
भले ही परिवार के सदस्य निवेश कर सकें, लेकिन खाते का मालिकाना हक और ऑपरेशनल कंट्रोल पूरी तरह से माता-पिता या कानूनी अभिभावकों के पास ही रहेगा। निवेश के फैसले, एसेट एलोकेशन और KYC की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। जो रिश्तेदार गिफ्ट के रूप में पैसे डालेंगे, उनका खाते पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होगा। जमा की गई राशि सीधे बच्चे की सुरक्षा और उसके लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल के लिए सुरक्षित (Ring-fenced) रहेगी।
बाजार से जुड़ा जोखिम और निवेश
यह स्कीम बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसी नहीं है, क्योंकि इसमें पैसा मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है। रिटर्न पूरी तरह से पेंशन फंड मैनेजर के पोर्टफोलियो की परफॉर्मेंस पर निर्भर करेगा। इसमें कोई गारंटीड रिटर्न नहीं है, इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर आपके फंड पर पड़ेगा। स्कीम में निवेश की अधिकतम सीमा कोई नहीं है, लेकिन कम से कम ₹250 सालाना निवेश के साथ आप शुरुआत कर सकते हैं।
विड्रॉल और ट्रांजिशन के नियम
इस स्कीम में पैसा लॉक-इन रहता है। विशेष परिस्थितियों जैसे कि बच्चे की पढ़ाई, बीमारी या विकलांगता के लिए 3 साल के बाद कुल जमा राशि का 25% तक ही निकाला जा सकता है। जब बच्चा 18 साल का होगा, तो उसे KYC अपडेट कराकर इस अकाउंट को रेगुलर NPS Tier-1 अकाउंट में बदलना होगा। वहीं, 21 साल की उम्र होने पर बच्चे के पास अपना फंड निकालने या आगे बढ़ाने का विकल्प होगा।
