नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत अब नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स अपने रिटायरमेंट फंड का **80%** तक एकमुश्त निकाल सकेंगे। PFRDA के इस फैसले से रिटायर्ड लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट के नियमों के कारण **20%** अतिरिक्त राशि पर टैक्स लग सकता है।
नई सुविधा और पुराना टैक्स कानून
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। अब ₹12 लाख से ज्यादा का कॉर्पस रखने वाले नॉन-गवर्नमेंट कर्मचारी अपने रिटायरमेंट सेविंग्स का 80% तक एकमुश्त (Lump Sum) निकाल पाएंगे। पहले यह सीमा 60% थी। इस बदलाव का मकसद था कि रिटायर्ड लोगों को अपने पैसों तक ज्यादा पहुंच मिले।
लेकिन, यहाँ एक बड़ा पेंच फँस गया है। PFRDA ने भले ही निकासी की सीमा 80% कर दी हो, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट में अभी तक कोई बदलाव नहीं हुआ है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(12A) के तहत, NPS कॉर्पस पर टैक्स छूट की सीमा अभी भी 60% पर ही है।
क्या होगा 80% निकालने पर?
इसका सीधा मतलब है कि आप 80% पैसा तो निकाल सकेंगे, लेकिन इसमें से सिर्फ 60% हिस्सा ही टैक्स-फ्री होगा। जो अतिरिक्त 20% आप निकालेंगे, उसे आपकी टैक्सेबल इनकम माना जाएगा। यह राशि आपके उस फाइनेंशियल ईयर की कुल आय में जुड़ जाएगी और आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। आपकी इनकम के आधार पर यह टैक्स 30% तक या उससे भी ज्यादा (सरचार्ज सहित) हो सकता है।
बड़े कॉर्पस वालों को ज्यादा नुकसान
जिन लोगों का रिटायरमेंट फंड बड़ा है, उनके लिए यह टैक्स का बोझ काफी भारी पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी सब्सक्राइबर का कुल कॉर्पस ₹50 लाख है और वह 80% यानी ₹40 लाख निकालता है। इसमें से केवल ₹30 लाख (60%) टैक्स-फ्री होंगे। बची हुई ₹10 लाख की राशि पर इनकम टैक्स लगेगा, जिससे उनकी टैक्स लायबिलिटी बढ़ सकती है और वे ऊँचे टैक्स ब्रैकेट में भी जा सकते हैं।
छोटे कॉर्पस वालों के लिए नियम अलग
छोटे कॉर्पस वालों के लिए नियम थोड़े अलग हैं। जिन लोगों का कुल कॉर्पस ₹8 लाख या उससे कम है, वे पूरी राशि बिना एन्युटी खरीदे निकाल सकते हैं। ₹8 लाख से ₹12 लाख के बीच कॉर्पस होने पर ₹6 लाख तक की एकमुश्त निकासी की जा सकती है, और बची हुई राशि को सिस्टेमेटिक यूनिट रिडेम्पशन (SUR) प्लान या एन्युटी के जरिए मैनेज किया जाएगा। इन कैटेगरी के लोगों को भी अपने टैक्स नियमों की जाँच करनी चाहिए, क्योंकि फंड निकालने के तरीके के आधार पर टैक्स नियम बदल सकते हैं।
एक्सपर्ट्स की सलाह
इस टैक्स के झोल को देखते हुए, एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि रिटायर्ड लोगों को अपनी निकासी की रणनीति सावधानी से बनानी चाहिए। तुरंत 80% निकालने की बजाय, कुछ लोग 60% की टैक्स-फ्री सीमा तक ही शुरुआती निकासी कर सकते हैं और बाकी पैसे को ऐसे प्लान कर सकते हैं कि टैक्स का बोझ कम से कम पड़े।
जब तक इनकम टैक्स एक्ट में PFRDA के नए नियमों के अनुसार बदलाव नहीं हो जाता, तब तक समझदारी से प्लानिंग करना बहुत जरूरी है ताकि रिटायरमेंट के पैसों पर बेवजह टैक्स न लगे। निवेशकों को आने वाले बजट या फाइनेंस एक्ट में ऐसे किसी भी बदलाव पर नजर रखनी चाहिए जो इन दोनों नियमों के बीच तालमेल बिठा सके।
