NPS Reforms: अब रिटायरमेंट में मिलेंगे ज्यादा पैसे, पर टैक्स और फैसलों का नया पेंच!

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AuthorNeha Patil|Published at:
NPS Reforms: अब रिटायरमेंट में मिलेंगे ज्यादा पैसे, पर टैक्स और फैसलों का नया पेंच!
Overview

NPS (National Pension System) में **2025 के आखिर** से लागू होने वाले नए नियमों से रिटायर होने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब **नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स** के लिए **अनिवार्य एन्युटी (Annuity)** का हिस्सा घटकर **20%** कर दिया गया है। इससे **₹12 लाख** से ज्यादा के कॉर्पस पर **80%** तक की रकम एकमुश्त (Lump Sum) निकाली जा सकेगी। वहीं, **₹8 लाख** या उससे कम के कॉर्पस पर **100%** तक की निकासी संभव होगी। हालांकि, इन बदलावों से फैसले लेने में थोड़ी मुश्किल बढ़ेगी और टैक्स का ध्यान रखना होगा, क्योंकि फिलहाल **60%** ही टैक्स-फ्री है।

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रिटायरमेंट में Cash की राह हुई आसान

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अपने सब्सक्राइबर्स के लिए सेविंग्स निकालने के नियमों में बड़े बदलाव करने जा रहा है। 2025 के आखिर से लागू होने वाले ये एडजस्टमेंट्स, खासकर नॉन-गवर्नमेंट कर्मचारियों के लिए, निकासी के विकल्पों को बदलने वाले हैं।

बड़े बदलाव: ज्यादा Lump Sum, कम Annuity

इस बदलाव का एक अहम हिस्सा है अनिवार्य एन्युटी (Annuity) का हिस्सा, जो 40% से घटाकर 20% कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब रिटायर होने वाले लोग अपनी जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा एकमुश्त (Lump Sum) निकाल सकेंगे। ₹12 लाख से अधिक के रिटायरमेंट अकाउंट्स के लिए, अब 80% तक की राशि Lump Sum के रूप में ली जा सकती है, जो पहले 60% थी। और भी बड़ी राहत ₹8 लाख या उससे कम के कॉर्पस (Corpus) वाले सब्सक्राइबर्स के लिए है, जो 100% तक की Lump Sum निकासी का विकल्प चुन सकते हैं।

विकल्पों के बीच सही चुनाव: Lump Sum, Annuity या SLW?

ये बढ़ी हुई निकासी की सुविधा रिटायर होने वाले लोगों के सामने कई रणनीतिक निर्णय प्रस्तुत करती है। एक तो है पूरी Lump Sum राशि निकालना, दूसरा है सिस्टमैटिक Lump-sum विद्ड्रॉल (SLW) का विकल्प चुनना। SLW, म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के Systematic Withdrawal Plans (SWPs) की तरह ही, धीरे-धीरे पैसा निकालने की सुविधा देता है, जिससे बचा हुआ कॉर्पस बढ़ता रहता है। यह पारंपरिक एन्युटी (Annuity) से अलग है, जो जीवन भर गारंटीड आय (Guaranteed Income) देती है, लेकिन अक्सर इसकी दरें कम होती हैं और आय पर टैक्स भी लगता है। इस मामले में Employee Provident Fund (EPF) और Public Provident Fund (PPF) जैसे विकल्प थोड़े सरल और अनुमानित निकासी संरचना देते हैं, हालांकि इनमें NPS जितनी फ्लेक्सिबिलिटी नहीं है। ऐसे में, सबसे अच्छा तरीका व्यक्ति की जोखिम लेने की क्षमता, स्वास्थ्य और तत्काल वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करेगा।

टैक्स का गणित और फैसलों का रिस्क

ज्यादा नकदी (Cash) मिलने के आकर्षण के बावजूद, NPS के नए नियम थोड़ी जटिलता भी लाते हैं। मुख्य मुद्दा टैक्सेशन (Taxation) का है: PFRDA 80% तक Lump Sum निकासी की अनुमति तो देता है, लेकिन वर्तमान इनकम टैक्स (Income Tax) कानून के तहत, सेक्शन 10(12A) के तहत केवल 60% कॉर्पस ही स्पष्ट रूप से टैक्स-फ्री (Tax-Free) है। ऐसे में, निकाली गई अतिरिक्त 20% राशि पर, जब तक टैक्स कानूनों में संशोधन नहीं होता, व्यक्ति की लागू इनकम टैक्स स्लैब (Income Tax Slab) दरों के हिसाब से टैक्स लग सकता है। इसका मतलब है कि बढ़ी हुई लिक्विडिटी (Liquidity) के साथ, निकासी के एक हिस्से पर तत्काल टैक्स बिल (Tax Bill) बढ़ सकता है। इसके अलावा, 20% की अनिवार्य एन्युटी (Annuity) में जमा राशि लॉक हो जाती है और उस पर मिलने वाली आय पर टैक्स लगता है। सब्सक्राइबर्स को यह भी जोखिम हो सकता है कि वे आसानी से पैसा निकाल पाने के कारण अपना कॉर्पस बहुत जल्दी खत्म कर दें, खासकर जब महंगाई (Inflation) के कारण तत्काल जरूरतें बढ़ जाएं। लंबी आयु का जोखिम, यानी बचत से ज्यादा जीने का जोखिम, तब और बड़ा हो जाता है जब तत्काल नकदी आसानी से उपलब्ध हो और बाजार की अस्थिरता (Market Volatility) शेष फंड को प्रभावित कर सके।

सुरक्षित रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग जरूरी

PFRDA के ये रिफॉर्म्स NPS को एक और फ्लेक्सिबल रिटायरमेंट सेविंग्स टूल (Retirement Savings Tool) के रूप में विकसित होते हुए दिखाते हैं। हालांकि, इन नए नियमों का पूरा फायदा उठाने के लिए यह जरूरी है कि रिटायर होने वाले लोग सोच-समझकर फैसले लें। तत्काल पूंजी (Capital) की जरूरत और लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। टैक्स के असर को समझना और व्यक्तिगत वित्तीय सलाह (Financial Advice) लेना, इन नए निकासी नियमों को प्रभावी ढंग से नेविगेट करने और रिटायरमेंट के दौरान लगातार वित्तीय कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.