National Pension System (NPS) में सब्सक्राइबर्स के पास दो रास्ते हैं: 'Active Choice' यानी खुद फैसले लेना और 'Auto Choice' यानी ऑटोमेटेड मैनेजमेंट। आपकी रिस्क लेने की क्षमता और रिटायरमेंट में बचे समय के आधार पर ही यह चुनाव आपके फंड की ग्रोथ तय करता है।
एक्टिव चॉइस (Active Choice): खुद बनें अपने पोर्टफोलियो के मैनेजर
अगर आप अपनी निवेश रणनीति को लेकर जागरूक हैं और बाजार की बारीकियों को समझते हैं, तो यह विकल्प आपके लिए है। इसमें आप खुद तय करते हैं कि आपका पैसा 4 एसेट क्लासेज—इक्विटी (Asset Class E), कॉर्पोरेट डेट (Asset Class C), सरकारी सिक्योरिटीज (Asset Class G) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (Asset Class A) में कितना जाएगा। इसमें सबसे बड़ा रिस्क 'कॉन्सेंट्रेशन' का है। अगर आप समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (Rebalance) नहीं करते, तो रिटायरमेंट के करीब पहुँचते ही आपका पैसा ज्यादा रिस्की हो सकता है।
ऑटो चॉइस (Auto Choice): उम्र के साथ बदलती निवेश की रफ्तार
यह विकल्प उन निवेशकों के लिए बेहतरीन है जो अनुशासन (Discipline) के साथ निवेश करना चाहते हैं। इसमें पेंशन फंड मैनेजर आपकी उम्र के हिसाब से एसेट एलोकेशन को खुद एडजस्ट करता है। शुरुआत में इक्विटी में ज्यादा एक्सपोजर होता है ताकि फंड तेजी से बढ़े, और रिटायरमेंट के करीब आते-आते पैसा सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स में शिफ्ट कर दिया जाता है। इसमें आप अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार LC75 (एग्रेसिव), LC50 (मॉडरेट), या LC25 (कंजरवेटिव) चुन सकते हैं।
आपके लिए क्या सही है?
फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आप मार्केट को कितना समय दे सकते हैं। अगर आपको पोर्टफोलियो ट्रैक करने का समय नहीं है, तो 'ऑटो चॉइस' बेहतर है क्योंकि यह मार्केट की उठापटक में इमोशनल फैसलों से बचाता है। वहीं, अगर आप मार्केट की अच्छी समझ रखते हैं, तो 'एक्टिव चॉइस' आपको कस्टमाइज्ड रिटर्न का मौका देता है। हालांकि, NPS एक लॉन्ग-टर्म निवेश है, इसलिए कम से कम साल में एक बार अपने अकाउंट को रिव्यू जरूर करें ताकि यह आपकी रिटायरमेंट की जरूरतों के साथ मेल खा सके।
