National Pension System में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन एक नई स्टडी चौंकाने वाली हकीकत बयां करती है। भारतीयों के रिटायरमेंट लक्ष्य और बढ़ती महंगाई के बीच एक बहुत बड़ा अंतर (Gap) देखने को मिल रहा है।
भारत में पेंशन सिस्टम को लेकर लोगों की सोच बदल रही है। HDFC Pension Fund Management की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, NPS प्रेफरेंस इंडेक्स 2023 में 54 था, जो 2026 में बढ़कर 57 हो गया है। अब लोग इसे सिर्फ टैक्स बचाने का जरिया नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद की आय का मुख्य साधन मान रहे हैं। जून 2026 तक NPS और Atal Pension Yojana (APY) के कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग 9.95 करोड़ पहुंच गई है, और ये स्कीम ₹17.7 लाख करोड़ के एसेट्स को मैनेज कर रही हैं।
प्लानिंग और हकीकत का अंतर
इस ग्रोथ के बावजूद एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने औसतन ₹1.5 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस (Corpus) लक्ष्य रखा है, जो कि 2023 में ₹1.34 करोड़ था। हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार यह रकम पर्याप्त नहीं है। हैरानी की बात यह है कि 75.5% लोगों के पास कोई फॉर्मल रिटायरमेंट प्लान ही नहीं है और वे भविष्य के लिए केवल अनुमानों या परिवार पर निर्भर हैं।
बढ़ते जोखिम और महंगाई
रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ा खतरा बढ़ती उम्र और मेडिकल खर्चों का है। हेल्थकेयर सेवाओं में महंगाई दर 12% से 14% तक चल रही है, जो किसी भी फिक्स्ड कॉर्पस को तेजी से खत्म कर सकती है। आज के समय में ₹1.5 करोड़ की राशि बहुत बड़ी लग सकती है, लेकिन 20 साल की रिटायरमेंट अवधि के दौरान महंगाई के असर को देखते हुए यह छोटी पड़ सकती है।
वर्कफोर्स का स्ट्रक्चरल गैप
भारत की करीब 90% वर्कफोर्स इनफॉर्मल सेक्टर में है, जिनके पास एंप्लॉयर-स्पॉन्सर्ड पेंशन का कोई लाभ नहीं है। जो लोग फॉर्मल सेक्टर में भी हैं, उनके पोर्टफोलियो अक्सर गलत तरीके से मैनेज किए जाते हैं। लोग अभी भी डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर ज्यादा झुके हुए हैं, जो लंबे समय में महंगाई को मात देने में नाकाम रहते हैं। निवेशकों को अब केवल एनरोलमेंट पर नहीं, बल्कि महंगाई को ध्यान में रखकर सही एसेट एलोकेशन पर ध्यान देने की जरूरत है।
