Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) ने NPS Tier I अकाउंट्स के लिए फुल विड्रॉल लिमिट को बढ़ाकर **₹8 लाख** कर दिया है। हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना होगा कि केवल **60%** राशि ही टैक्स-फ्री है, बाकी **40%** पर टैक्स लग सकता है।
निकासी के नियम और बड़ा बदलाव
PFRDA ने अपने नए एग्जिट गाइडलाइंस के तहत उन सब्सक्राइबर्स को पूरी रकम निकालने की अनुमति दे दी है, जिनका NPS Tier I कॉर्पस ₹8 लाख या उससे कम है। जून 2025 में लागू हुए इस बदलाव का मकसद छोटे अकाउंट्स वाले निवेशकों को अधिक लिक्विडिटी देना है। हालांकि, इस फैसले के बाद PFRDA के नियमों और इनकम टैक्स एक्ट के बीच एक बड़ा तालमेल का अभाव देखने को मिल रहा है।
टैक्स का गणित (Tax Reality)
भले ही PFRDA आपको पूरी रकम निकालने की छूट दे रहा है, लेकिन इनकम टैक्स एक्ट के पुराने नियम अभी भी लागू हैं। नियमों के मुताबिक, NPS एग्जिट के समय केवल 60 प्रतिशत कॉर्पस ही टैक्स से छूट प्राप्त है। शेष 40 प्रतिशत हिस्सा आपकी टैक्सेबल इनकम माना जाएगा और उस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।
उदाहरण के लिए, यदि आप पूरी ₹8 लाख की रकम निकालते हैं, तो केवल 60 प्रतिशत पर ही टैक्स नहीं लगेगा, जबकि बाकी 40 प्रतिशत को आपकी कुल कमाई में जोड़कर उस पर टैक्स की गणना की जाएगी। यह उन निवेशकों के लिए झटका हो सकता है जो इसे 'पूरी तरह टैक्स-फ्री' समझकर पैसा निकाल रहे हैं।
बड़े कॉर्पस के लिए क्या हैं नियम?
जिनका बैलेंस ₹8 लाख से ₹12 लाख के बीच है, उनके लिए कम से कम ₹6 लाख का एन्युटी (Annuity) खरीदना अनिवार्य है। वहीं, ₹12 लाख से अधिक के कॉर्पस पर 20 प्रतिशत एन्युटी अनिवार्य है, जबकि बाकी 80 प्रतिशत टैक्स-फ्री होती है।
निवेशकों के लिए सलाह
पूरी रकम निकालने से पहले अपने टैक्स आउटगो (Tax Outgo) की कैलकुलेशन जरूर करें। जब तक सरकार PFRDA के नियमों और इनकम टैक्स कानून में सामंजस्य नहीं बिठाती, तब तक टैक्स के नियम ही सर्वोपरि रहेंगे। बेहतर होगा कि कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले आप किसी एक्सपर्ट से सलाह लें या इनकम टैक्स पोर्टल पर अपनी संभावित टैक्स लायबिलिटी की जांच कर लें।
