NPS Exit Rules Eased: अब **80%** तक निकालें पैसा, निवेशकों के लिए बड़ी राहत!

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AuthorNeha Patil|Published at:
NPS Exit Rules Eased: अब **80%** तक निकालें पैसा, निवेशकों के लिए बड़ी राहत!
Overview

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। खास तौर पर गैर-सरकारी सब्सक्राइबर्स के लिए, अब **80%** तक कॉर्पस को एकमुश्त (lump sum) निकाला जा सकता है, जो पहले **60%** था। साथ ही, **5 साल** की मिनिमम लॉक-इन अवधि को भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

लिक्विडिटी का नया दौर

PFRDA के इन बड़े फैसलों से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अब पहले से कहीं ज्यादा फ्लेक्सिबल और ग्राहक-अनुकूल हो गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब 5 साल की मिनिमम लॉक-इन पीरियड की शर्त को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि सब्सक्राइबर्स किसी भी समय, अपनी जरूरत के अनुसार, NPS से पैसे निकाल सकते हैं।

इसके अलावा, एन्युइटी (Annuity) यानी पेंशन के रूप में मिलने वाली अनिवार्य खरीद को 40% से घटाकर सिर्फ 20% कर दिया गया है। वहीं, 12 लाख रुपये से अधिक के कॉर्पस पर अब 80% तक की रकम को एकमुश्त (lump sum) निकाला जा सकता है, जो पहले 60% तक सीमित था। यह बदलाव रिटायरमेंट के समय या उसके आसपास पैसों की जरूरत को पूरा करने में ज्यादा आसानी देगा, क्योंकि अब जमा हुई राशि का बड़ा हिस्सा तुरंत उपलब्ध होगा।

मुकाबले में NPS की बढ़ी साख

इन सुधारों के बाद NPS अब अन्य लोकप्रिय रिटायरमेंट सेविंग स्कीम्स जैसे एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) के मुकाबले कहीं ज्यादा कॉम्पिटिटिव (competitive) बन गया है। EPF में रिटायरमेंट पर पूरा पैसा निकालने की सुविधा है, जबकि PPF की 15 साल की लंबी लॉक-इन अवधि है। NPS के नए नियम इन सबसे ज्यादा लचीलापन प्रदान करते हैं, जिससे यह उन लोगों के लिए भी आकर्षक हो गया है जो अपने रिटायरमेंट फंड्स पर ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं।

बाजार पर क्या होगा असर?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन बदलावों से NPS में निवेश करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। यह विशेष रूप से युवा वर्ग और गिग इकॉनमी (Gig Economy) में काम करने वाले लोगों को आकर्षित करेगा, जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, एन्युइटी प्रोवाइडर्स (Annuity Providers) के लिए यह एक चुनौती हो सकती है, क्योंकि अब कम पैसा एन्युइटी में कन्वर्ट होगा।

ध्यान देने योग्य बातें

हालांकि, कुछ बातें गौर करने लायक हैं। जो अतिरिक्त 20% लंप सम राशि निकाली जा रही है, उस पर टैक्स का क्या नियम लागू होगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा, यदि कोई सब्सक्राइबर एन्युइटी की खरीद कम करता है, तो उसे जीवन भर मिलने वाली गारंटीड आय का विकल्प कम हो जाएगा। अगर निकाली गई लंप सम राशि का सही प्रबंधन न किया जाए, तो रिटायरमेंट के बाद पैसों के खत्म होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। एन्युइटी से मिलने वाली ब्याज दरें भी बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती हैं।

आगे का रास्ता

PFRDA का लक्ष्य NPS को व्यापक आबादी तक पहुंचाना है, और इन नियमों के साथ, वे अपने 25 करोड़ प्राइवेट सेक्टर सिटीजन्स को पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह NPS के विकास में एक नया अध्याय खोलेगा, इसे एक अधिक गतिशील और सुलभ रिटायरमेंट सेविंग सॉल्यूशन के रूप में स्थापित करेगा।

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