हालिया डेटा बताता है कि जहां पिछले एक साल में NPS की इक्विटी स्कीम में करीब **6.70%** की गिरावट आई है, वहीं 10 साल की अवधि में इसने **11.75%** का सालाना रिटर्न दिया है। यह अंतर बताता है कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए धैर्य क्यों जरूरी है।
नवंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के इक्विटी-हैवी पोर्टफोलियो ने पिछले एक साल में 6.70% की गिरावट दर्ज की है। हालांकि, लंबे समय का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए तस्वीर पूरी तरह अलग है। पिछले दस सालों में, इन इक्विटी एसेट्स ने औसतन 11.75% का सालाना रिटर्न देकर यह साबित किया है कि बाजार का शोर लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के आगे बौना है।
शॉर्ट-टर्म के जाल से बचें
रिटायरमेंट प्लानिंग कोई स्प्रिंट नहीं, बल्कि एक मैराथन है। 11.75% का दशक का रिटर्न इस बात की याद दिलाता है कि कंपाउंडिंग ही रिटायरमेंट वेल्थ का मुख्य इंजन है। कई निवेशक एक खराब साल देखकर फंड स्विच करने या निवेश रोकने की गलती करते हैं, जिससे कंपाउंडिंग की ताकत खत्म हो जाती है और अंत में एक बड़ा कॉर्पस बनाने का मौका हाथ से निकल जाता है।
एसेट मिक्स को समझें
NPS को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G) का मिला-जुला मिश्रण होता है। जहां इक्विटी ग्रोथ देती है, वहीं बॉन्ड्स और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट की अस्थिरता (Volatility) के दौरान एक बफर की तरह काम करते हैं और पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करते हैं।
जोखिम और निवेश की सीख
यह याद रखना जरूरी है कि NPS रिटर्न मार्केट-लिंक्ड होते हैं और ये फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह गारंटीड नहीं होते। रिटायरमेंट कॉर्पस के लिए सबसे बड़ा खतरा मार्केट नहीं, बल्कि निवेशक का व्यवहार है। 'मार्केट टाइमिंग' के चक्कर में निवेश रोकना सबसे बड़ी चूक हो सकती है। बाजार की उठा-पटक के बावजूद अपने निवेश को जारी रखना ही भविष्य में बेहतर रिटर्न पाने का एकमात्र मंत्र है।
