NPS से रिटायरमेंट के समय एन्युटी (Annuity) चुनना एक बड़ा फैसला होता है। आपको अपनी मौजूदा मंथली इनकम और भविष्य में परिवार की सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाना होगा। चूंकि यह फैसला अक्सर स्थाई होता है, इसलिए सेवा प्रदाताओं के बीच सही तुलना करना जरूरी है।
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से 60 साल या उससे अधिक की उम्र में बाहर निकलते समय, सब्सक्राइबर्स को अपने जमा किए हुए फंड को लेकर एक अहम फैसला लेना होता है। नियमों के अनुसार, कॉर्पस का एक बड़ा हिस्सा एन्युटी खरीदने में इस्तेमाल करना अनिवार्य है। यह एक तरह का कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके जरिए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी आपको जीवन भर फिक्स्ड मंथली पेंशन की गारंटी देती है।
यह फैसला सिर्फ एक प्लान चुनने का नहीं, बल्कि आपकी आने वाली दशकों की फाइनेंशियल जर्नी तय करने का है। चूंकि ये एन्युटी कॉन्ट्रैक्ट्स एक बार फाइनल होने के बाद आमतौर पर बदले नहीं जा सकते, इसलिए विकल्पों को समझना बेहद जरूरी है।
एन्युटी के प्रमुख विकल्प
सबसे सरल विकल्प 'लाइफ-ओनली एन्युटी' है। इसमें मंथली पेंशन सबसे ज्यादा मिलती है, क्योंकि सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद इंश्योरेंस कंपनी पेंशन देना बंद कर देती है। यह उन लोगों के लिए सही है जो विरासत (Legacy) की चिंता किए बिना रिटायरमेंट में अधिक कैश फ्लो चाहते हैं।
वहीं, परिवार की सुरक्षा चाहने वाले लोग 'रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस' विकल्प चुन सकते हैं। इसमें मंथली पेंशन थोड़ी कम होती है, क्योंकि कंपनी को मूल राशि सुरक्षित रखनी पड़ती है। सब्सक्राइबर की मृत्यु पर नॉमिनी को पूरा पैसा वापस मिल जाता है।
पति-पत्नी और परिवार की सुरक्षा
शादीशुदा लोगों के लिए 'जॉइंट-लाइफ एन्युटी' एक बेहतर विकल्प है। इसमें मुख्य सब्सक्राइबर के बाद जीवनसाथी को पेंशन मिलती रहती है। यदि आप इसमें 'रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस' जोड़ते हैं, तो यह और भी सुरक्षित हो जाता है, क्योंकि अंत में यह पैसा आपके बच्चों या उत्तराधिकारियों को वापस मिल जाता है।
कुछ प्रोवाइडर्स 'फैमिली इनकम' विकल्प भी देते हैं, जहाँ पेंशन सब्सक्राइबर के बाद जीवनसाथी और फिर आश्रित माता-पिता तक जा सकती है। हालाँकि, सुरक्षा जितनी अधिक होगी, शुरुआती मंथली पेंशन उतनी ही कम हो सकती है।
तुलना करना क्यों जरूरी है?
एन्युटी की दरें अलग-अलग कंपनियों में काफी अलग हो सकती हैं। बढ़ती महंगाई को देखते हुए, शुरुआत में ही सबसे अच्छी दर हासिल करना जरूरी है। निवेश करने से पहले विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर्स के ऑफर्स की तुलना करें और यह कैलकुलेट करें कि क्या ज्यादा पेंशन के चक्कर में मूलधन खोना आपके लिए सही फैसला है।
