श्रम मंत्रालय ने EPF के तहत आने वाले Exempted Provident Fund Trusts को New Development Bank (NDB) के रुपया-डिनोमिनेटेड बॉन्ड्स में निवेश करने की मंजूरी दे दी है। यह कदम बैंक के **₹25,000 करोड़** जुटाने के लक्ष्य में मदद करेगा।
निवेश के नए नियम
श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब एग्जेंप्टेड प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट्स अपनी पूंजी को New Development Bank के बॉन्ड्स में लगा सकेंगे। इस निवेश के लिए मुख्य शर्त यह है कि बॉन्ड्स की मैच्योरिटी कम से कम 3 साल होनी चाहिए। यह फैसला न केवल प्राइवेट ट्रस्ट्स के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाता है, बल्कि सरकारी नियमों के अनुरूप पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने का मौका भी देता है।
बैंक की रणनीति और लक्ष्य
New Development Bank भारत में अगले 5 वर्षों में लगभग ₹25,000 करोड़ का फंड जुटाने की योजना बना रही है। पेंशन फंड्स और इंश्योरेंस रेगुलेटर्स (PFRDA और IRDAI) को पहले ही ऐसी अनुमति मिल चुकी है, और अब प्रोविडेंट फंड ट्रस्ट्स को शामिल करके बैंक स्थानीय बॉन्ड मार्केट को गहरा और स्थिर बनाने की कोशिश कर रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सावधानी
हालांकि यह निवेश का एक नया एवेन्यू है, लेकिन ट्रस्ट मैनेजरों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा:
- इंटरेस्ट रेट रिस्क: फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी होने के कारण, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का असर इन बॉन्ड्स की मार्केट वैल्यू पर पड़ेगा।
- लिक्विडिटी: सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की तुलना में इनकी सेकेंडरी मार्केट लिक्विडिटी कम हो सकती है।
- फिड्यूशियरी जिम्मेदारी: चूंकि ट्रस्ट्स पर कर्मचारियों के पैसे की जिम्मेदारी होती है, इसलिए किसी भी नुकसान की स्थिति में नियोक्ताओं (Employers) को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
वर्तमान में, इन ट्रस्ट्स के लिए डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा 35% से 45% के बीच है। ट्रस्ट मैनेजर्स को अब क्रेडिट क्वालिटी और यील्ड को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो में इन बॉन्ड्स की जगह तय करनी होगी।
