रिटायरमेंट के करीब? इक्विटी से डेट में शिफ्ट होने के ये हैं फायदे, जानें क्यों है जरूरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
रिटायरमेंट के करीब? इक्विटी से डेट में शिफ्ट होने के ये हैं फायदे, जानें क्यों है जरूरी

जैसे-जैसे रिटायरमेंट (Retirement) नजदीक आता है, एक्सपर्ट्स निवेशकों को अपनी पूंजी को सुरक्षित करने के लिए इक्विटी (Equity) से धीरे-धीरे डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) की ओर बढ़ने की सलाह दे रहे हैं। यह कदम बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने और पूंजी की स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।

रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में बदलाव क्यों जरूरी?

ज्यादातर निवेशकों के लिए शेयर बाजार में निवेश का मुख्य लक्ष्य धन बढ़ाना होता है। लेकिन, रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आते ही, वित्तीय प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। अब जोर आक्रामक ग्रोथ (Aggressive Growth) से हटकर पूंजी संरक्षण (Wealth Preservation) पर आ जाना चाहिए। रिटायरमेंट से ठीक पहले या शुरुआती सालों में बाजार में आई कोई भी बड़ी गिरावट आपकी मेहनत की कमाई को काफी कम कर सकती है। इससे आपको तब पैसे निकालने पड़ सकते हैं जब शेयर की कीमतें कम हों। इससे बचने के लिए, वित्तीय सलाहकार अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits), सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) या डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) जैसे डेट-आधारित संपत्तियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह देते हैं।

धीरे-धीरे बदलाव का तर्क

एक झटके में सारा पैसा इक्विटी से डेट में शिफ्ट करना एक अच्छा विकल्प नहीं माना जाता, क्योंकि अगर बाजार नीचे जा रहा है तो इससे नुकसान लॉक हो सकता है। इसके बजाय, धीरे-धीरे यानी रिटायरमेंट से तीन से पांच साल पहले यह बदलाव शुरू करना निवेशकों को अपनी इक्विटी होल्डिंग्स को किस्तों में बेचने का मौका देता है। कई सालों में इस बदलाव को फैलाने से बाजार को गलत समय पर पकड़ने का जोखिम कम हो जाता है। यह तरीका इक्विटी से बाहर निकलने की प्रक्रिया को रोकने या धीमा करने का लचीलापन भी देता है, खासकर अगर बाजार में अस्थायी गिरावट आ रही हो।

स्थिरता और महंगाई का संतुलन

हालांकि डेट इंस्ट्रूमेंट्स आवश्यक सुरक्षा और एक निश्चित आय प्रदान करते हैं, लेकिन वे अक्सर 20-30 साल की रिटायरमेंट अवधि में बढ़ती लागतों के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष करते हैं। केवल नकदी या कम ब्याज वाले डेट रखना मुद्रास्फीति (Inflation) के कारण रिटायरमेंट फंड की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को कम कर सकता है। इसलिए, रणनीति पूरी तरह से शेयर बाजार से बाहर निकलना नहीं है। इसके बजाय, कई सलाहकार सलाह देते हैं कि आप डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड (Diversified Equity Funds) में एक छोटा, संतुलित हिस्सा बनाए रखें ताकि रिटायरमेंट के दौरान भी आपके समग्र पोर्टफोलियो में कुछ ग्रोथ की संभावना बनी रहे।

पोर्टफोलियो प्रबंधन के जरूरी पहलू

रिटायरमेंट प्लान एक 'सेट एंड फॉरगेट' (Set and Forget) रणनीति नहीं है। जैसे-जैसे व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतें बदलती हैं - जैसे मेडिकल खर्च, पारिवारिक जिम्मेदारियां, या आय के नए स्रोत - पोर्टफोलियो को समायोजित करने की आवश्यकता होती है। आपकी संपत्ति आवंटन (Asset Allocation) की वार्षिक समीक्षा आवश्यक है ताकि इक्विटी और डेट के बीच का विभाजन आपके आराम के स्तर और वित्तीय आवश्यकताओं के अनुरूप बना रहे। निवेशकों को आपातकालीन फंड (Emergency Funds) का भी ध्यान रखना चाहिए, जिसे मुख्य रिटायरमेंट कॉर्पस से अलग, पूरी तरह से लिक्विड रखा जाए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार की अस्थिरता कभी भी दीर्घकालिक निवेशों को समय से पहले बेचने पर मजबूर न करे।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इस बदलाव की योजना बनाते समय, विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर लगने वाले टैक्स (Taxation) को ट्रैक करें, क्योंकि यह आपके नेट रिटर्न को प्रभावित करता है। अपनी व्यक्तिगत रिटायरमेंट समय-सीमा की निगरानी करें और अपने मौजूदा डेट दायित्वों और स्वास्थ्य बीमा कवरेज के आधार पर बदलाव की गति को समायोजित करें। अंत में, हर साल अपनी वार्षिक समीक्षा के दौरान अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी-टू-डेट अनुपात (Equity-to-Debt Ratio) पर कड़ी नजर रखें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह आपके लक्षित जोखिम प्रोफाइल (Risk Profile) से मेल खाता है।

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