अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख चूक गए हैं, तो 'Updated ITR' के जरिए रिफंड नहीं मिल सकता। ऐसे में, आपको इनकम टैक्स एक्ट के Section 119(2)(b) के तहत 'condonation of delay' के लिए आवेदन करना होगा। CBDT Circular 11/2024 के तहत आप रिफंड का दावा तो कर सकते हैं, लेकिन इस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
ITR-U की सीमाएं और विकल्प
आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन मिस होने पर टैक्सपेयर्स अक्सर परेशान हो जाते हैं। विभाग ने 'Updated ITR' (ITR-U) की सुविधा जरूर दी है, लेकिन यह केवल टैक्स भरने या रिटर्न सुधारने के लिए है। इसके जरिए आप नया रिफंड क्लेम नहीं कर सकते और न ही अपने रिफंड की राशि को बढ़ा सकते हैं।
'Condonation of Delay' की प्रक्रिया
जिन टैक्सपेयर्स का रिफंड बकाया है, वे इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के Section 119(2)(b) का लाभ उठा सकते हैं। यह सेक्शन CBDT को अधिकार देता है कि वह देरी से आए रिफंड आवेदनों को स्वीकार कर सके। वर्तमान में, 1 अक्टूबर 2024 को जारी CBDT Circular 11/2024 इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
आवेदन और अप्रूवल का गणित
आपको अपने क्षेत्राधिकार वाले 'Assessing Officer' के पास आवेदन करना होगा। कानून के मुताबिक, संबंधित असेसमेंट ईयर खत्म होने के 5 साल के भीतर आप यह आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन की मंजूरी इस पर निर्भर करती है कि आप देरी का कितना ठोस कारण दे पाते हैं। CBDT ने अलग-अलग रिफंड राशि के लिए अधिकारियों (जैसे Principal Commissioner या Principal Chief Commissioner) को तय सीमा के अनुसार मंजूरी देने का अधिकार दिया है।
ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें
यह प्रक्रिया अपनाने से पहले इन बातों को गांठ बांध लें:
- ब्याज नहीं मिलेगा: इस रूट के जरिए मिलने वाले रिफंड पर आपको कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा।
- डिस्क्रिप्शनरी पावर: अधिकारियों के पास आपके आवेदन को स्वीकार या खारिज करने का विवेक होता है, इसलिए इसकी कोई गारंटी नहीं है।
- एडजस्टमेंट: अगर आपके ऊपर कोई पुराना टैक्स बकाया है, तो Section 245 के तहत आपका अप्रूव्ड रिफंड उस पुराने बकाये में एडजस्ट किया जा सकता है।
इसे समय पर ITR फाइल करने का विकल्प न मानकर, इसे अंतिम उपाय के रूप में ही देखें।
