SIP रोकने की गलती: मार्केट गिरने पर कहीं आपका ये फैसला गलत न हो जाए!

PERSONAL-FINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
SIP रोकने की गलती: मार्केट गिरने पर कहीं आपका ये फैसला गलत न हो जाए!

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

मार्केट में गिरावट देखकर निवेशक घबरा जाते हैं और अपना एसआईपी (SIP) रोकना चाहते हैं। लेकिन, जानकारों का कहना है कि ऐसे में निवेश जारी रखने से आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलते हैं। असली जरूरत पड़ने पर ही एसआईपी रोकनी चाहिए, वरना लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए रेगुलर निवेश जरूरी है।

क्या होता है जब मार्केट गिरता है?

जब शेयर बाजार में उथल-पुथल मचती है या शेयर की कीमतें तेजी से गिरती हैं, तो म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों के मन में चिंता होना स्वाभाविक है। इस डर से अक्सर लोग अपने सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को रोकने या बंद करने का मन बना लेते हैं। लेकिन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि एसआईपी का मुख्य उद्देश्य बाजार के उतार-चढ़ाव से बेपरवाह होकर लगातार निवेश करते रहना है। निवेश रोकने का फैसला अक्सर भावनाओं में बहकर लिया जाता है, न कि सोच-समझकर।

मार्केट गिरने पर एसआईपी का गणित

गिरते बाजार में एसआईपी जारी रखने का सबसे बड़ा फायदा है 'रुपया कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging)। जब आप एसआईपी के तहत हर महीने एक तय रकम निवेश करते हैं और उस समय म्यूचुअल फंड यूनिट्स की कीमत गिर जाती है, तो आपकी वही रकम ज्यादा यूनिट्स खरीद लेती है। इसके विपरीत, जब बाजार चढ़ता है, तो आपकी तय रकम से कम यूनिट्स खरीदी जाती हैं। लंबे समय में, यह तरीका आपके हर यूनिट की औसत लागत को कम कर देता है। जब बाजार आखिरकार सुधरता है, तो मंदी के दौरान जमा की गई ज्यादा यूनिट्स की वजह से आपके पोर्टफोलियो का कुल मूल्य काफी बढ़ जाता है, बजाय इसके कि आपने निवेश रोक दिया हो।

भावनाओं में बहकर लिए फैसले क्यों पड़ सकते हैं भारी?

जब खबरें नकारात्मक होती हैं और पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरती है, तो इंसान स्वाभाविक रूप से अपने पैसे को बचाना चाहता है। इसे 'लॉस एवर्जन' (Loss Aversion) भी कहते हैं। लेकिन, इस डर के चलते निवेश रोकना मतलब निवेशक बाजार चक्र के इस महत्वपूर्ण 'एक्युमुलेशन फेज' (Accumulation Phase) को गंवा सकता है। शेयर बाजार में रिकवरी अक्सर तेज और अप्रत्याशित होती है। एक 'सुरक्षित' समय का इंतजार करने के लिए साइडलाइन पर बैठे रहने से निवेशक अक्सर ऊंची कीमतों पर बाजार में वापस आते हैं, जिससे लंबी अवधि में धन बनाने का फायदा कम हो जाता है।

एसआईपी रोकने का एकमात्र वाजिब कारण

मार्केट के डर से एसआईपी रोकने और किसी निजी वित्तीय आपातकाल के कारण एसआईपी रोकने में बहुत बड़ा अंतर है। अगर किसी निवेशक को सचमुच किसी आपात स्थिति का सामना करना पड़ता है, जैसे कि नौकरी छूटना, सैलरी में भारी कमी आना, या कोई अचानक मेडिकल खर्च, तो एसआईपी रोकना एक जिम्मेदार कदम हो सकता है। ऐसी स्थिति में, पहली प्राथमिकता अपनी जीवित रहने और जरूरी जरूरतों के लिए नकदी प्रवाह (Cash Flow) सुनिश्चित करना होनी चाहिए। इसी उद्देश्य के लिए इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) बनाया जाता है। अगर आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है और आप अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो अपनी वित्तीय योजना में बदलाव करना व्यावहारिक है। यह एक व्यक्तिगत वित्तीय निर्णय है, न कि बाजार की अस्थिरता पर प्रतिक्रिया।

लंबी अवधि के लक्ष्यों से तालमेल बिठाना

निवेश योजना में कोई भी बदलाव करने से पहले, निवेशकों को अपने मूल लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। चाहे आप बच्चों की शिक्षा, घर खरीदने या रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे हों, ये लक्ष्य आमतौर पर सालों या दशकों दूर होते हैं। कुछ हफ्तों या महीनों का अल्पकालिक बाजार सुधार, दस या बीस साल की निवेश यात्रा में एक छोटी सी बात होती है। निवेश को लंबी अवधि के लक्ष्यों के नजरिए से देखने से अस्थायी बाजार के शोर से होने वाली चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है।

निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?

निवेशक दो बातों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं: अपनी लिक्विडिटी (Liquidity) और अपनी एसेट एलोकेशन (Asset Allocation)। सबसे पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास कम से कम छह महीने के जरूरी खर्चों को कवर करने के लिए एक इमरजेंसी फंड हो, जिससे किसी संकट के दौरान आपके लंबी अवधि के निवेश को छूने की जरूरत न पड़े। दूसरा, अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जोखिम का स्तर अभी भी आपके दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप है। यदि आपने ये दो काम कर लिए हैं, तो किसी भी दिन व्यापक बाजार सूचकांक (Market Index) कुछ भी कर रहा हो, अपनी मासिक एसआईपी के अनुशासन को बनाए रखना अक्सर सबसे प्रभावी रणनीति होती है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.