निवेशक की मृत्यु के बाद PPF और ELSS जैसे निवेशों का क्या होगा? जानें क्लेम की पूरी प्रक्रिया

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AuthorAditya Rao|Published at:
निवेशक की मृत्यु के बाद PPF और ELSS जैसे निवेशों का क्या होगा? जानें क्लेम की पूरी प्रक्रिया

निवेशक की मृत्यु के बाद PPF और ELSS जैसे लॉक-इन निवेश अचानक लिक्विड नहीं होते हैं। कानूनी वारिसों को इन्हें क्लेम करने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है, जो नॉमिनेशन और नियमों पर आधारित होती है।

किसी अपने के गुजर जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ तो टूटता ही है, साथ ही फाइनेंशियल एसेट्स को मैनेज करना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। निवेशकों में अक्सर यह गलतफहमी होती है कि खाताधारक की मृत्यु होते ही PPF या ELSS जैसे लॉक-इन निवेश अपने आप खुल जाते हैं। असल में, इन निवेशों पर स्कीम के ओरिजिनल नियम लागू रहते हैं, यानी निवेशक की मृत्यु के बाद भी लॉक-इन पीरियड खत्म नहीं होता।

ट्रांसमिशन (Transmission) की प्रक्रिया

मृतक के निवेश को परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया को 'ट्रांसमिशन' कहते हैं। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या कोई वैध 'नॉमिनेशन' मौजूद है या नहीं। अगर नॉमिनी पहले से दर्ज है, तो बैंक या म्यूचुअल फंड हाउस डेथ सर्टिफिकेट और पहचान की जांच के बाद एसेट्स रिलीज कर देते हैं। लेकिन जहां नॉमिनेशन नहीं है, वहां कानूनी वारिसों को सक्सेशन सर्टिफिकेट या लीगल हेयरशिप सर्टिफिकेट जैसे अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ते हैं।

याद रखें, भारत में नॉमिनी सिर्फ एक 'ट्रस्टी' की तरह होता है। वह फंड रिसीव करने के लिए अधिकृत है, लेकिन वह पैसे का असली मालिक तब तक नहीं है जब तक कि वह कानूनी उत्तराधिकारी न हो।

PPF और ELSS के खास नियम

PPF अकाउंट के मामले में, सब्सक्राइबर की मृत्यु के बाद खाता तुरंत बंद करना पड़ता है। नॉमिनी या कानूनी वारिस इसे आगे नहीं चला सकते। बैंक या पोस्ट ऑफिस खाता बंद कर मृत्यु की तारीख तक का ब्याज जोड़कर सेटलमेंट कर देता है।

वहीं, ELSS या अन्य लॉक-इन वाले म्यूचुअल फंड में यूनिट्स का लॉक-इन निवेशक की मृत्यु से खत्म नहीं होता। वारिसों को मैच्योरिटी तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक कि फंड हाउस किसी विशेष परिस्थिति में छूट न दे। SEBI के नियमों के मुताबिक, सभी म्यूचुअल फंड हाउस को यही प्रक्रिया अपनानी होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट्स

एसेट्स को क्लेम करने के लिए डेथ सर्टिफिकेट, ट्रांसमिशन के लिए रिक्वेस्ट लेटर और क्लेम करने वाले का KYC सबसे महत्वपूर्ण है। निवेश को आसान बनाने के लिए हमेशा अपने सभी अकाउंट्स और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन को अपडेट रखें और परिवार के साथ इन निवेशों की लिस्ट शेयर करें ताकि उन्हें कानूनी उलझनों का सामना न करना पड़े।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.