हेल्थकेयर की महंगाई आम महंगाई से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, जो डिसेबिलिटी से जूझ रहे परिवारों पर बड़ा वित्तीय दबाव डालती है। ऐसे में सेक्शन 80U, 80DD जैसे टैक्स बेनेफिट्स और सही इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी अपनाकर आप लंबे समय के लिए एक मजबूत कॉर्पस (Corpus) तैयार कर सकते हैं।
भारत में हेल्थकेयर से जुड़ी महंगाई दर अक्सर डबल डिजिट में रहती है, जो दवाइयों, मेडिकल जांच और थेरेपी के खर्चों को लगातार बढ़ाती है। बचत को खत्म होने से बचाने के लिए केवल पारंपरिक बचत खातों या डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर निर्भर रहना काफी नहीं है।
लंबी अवधि के लिए इक्विटी का सहारा
लंबे समय में महंगाई को मात देने के लिए डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए निवेश करना एक असरदार तरीका है। 10 साल से अधिक के होराइजन पर इक्विटी फंड्स का कंपाउंडिंग इफेक्ट आपके निवेश को एक ऐसे सुरक्षा कवच में बदल सकता है, जो आने वाले समय में बढ़ते मेडिकल खर्चों को कवर करने में सक्षम हो।
टैक्स बचाएं और री-इन्वेस्ट करें
इनकम टैक्स एक्ट के तहत मिलने वाली छूट का लाभ उठाना बहुत जरूरी है:
- सेक्शन 80U: इसके तहत सर्टिफाइड डिसेबिलिटी वाले व्यक्ति ₹75,000 (सामान्य) से ₹1.25 लाख (गंभीर) तक की फ्लैट डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
- सेक्शन 80DD: यदि आप किसी आश्रित (Dependent) की देखभाल कर रहे हैं, तो उन पर होने वाले खर्च के लिए टैक्स में छूट पा सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इन टैक्स बचतों को खर्च न करके वापस ग्रोथ-ओरिएंटेड एसेट्स में निवेश करें, ताकि आपका कॉर्पस तेजी से बड़ा हो सके।
रिस्क मैनेजमेंट के लिए इंश्योरेंस
सिर्फ बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस काफी नहीं होता। किसी भी बड़े मेडिकल इमरजेंसी के वक्त अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए 'सुपर टॉप-अप' (Super Top-up) प्लान जरूर लें। ये प्लान कम प्रीमियम पर बड़ी कवर राशि देते हैं और आपकी मुख्य पॉलिसी के खत्म होने के बाद सक्रिय होते हैं।
अंत में, समय के साथ अपनी योजना की समीक्षा करते रहें। गंभीर परिस्थितियों में एक प्राइवेट ट्रस्ट बनाना भी एक अच्छा विकल्प है, ताकि लाभार्थियों की जरूरतें जीवन भर पूरी होती रहें।
