अचानक पैसों की ज़रूरत पड़ जाए तो PPF या म्यूचुअल फंड बेचें नहीं! आप इन पर लोन ले सकते हैं। PPF लोन पर ब्याज कम है, लेकिन लिमिट तय है। म्यूचुअल फंड लोन जल्दी मिलता है और ज्यादा पैसा देता है, पर इसमें बाज़ार का रिस्क है। समझिए दोनों के फायदे-नुकसान।
क्या है मामला?
जब अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाता है, तो अक्सर लंबे समय के निवेश को बेचना पड़ता है। इससे कंपाउंडिंग (Compounding) का फायदा तो जाता ही है, साथ ही टैक्स (Tax) भी लग सकता है। ऐसे में, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) अकाउंट या म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) पोर्टफोलियो जैसे अपने मौजूदा एसेट्स पर लोन लेना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। दोनों ही तरीकों से आप अपना निवेश बचाए रखते हुए जरूरत के पैसे का जुगाड़ कर सकते हैं। पर, इनके नियम, खर्च और रिस्क अलग-अलग हैं, जिन्हें जानना ज़रूरी है।
PPF पर लोन का ऑप्शन
PPF अकाउंट पर लोन लेना एक सुरक्षित, सरकारी गारंटी वाला तरीका है। यह आमतौर पर अकाउंट खोलने के तीसरे फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) से छठे फाइनेंशियल ईयर के आखिर तक मिलता है। इसमें लोन की राशि पर एक बड़ी पाबंदी है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के आखिर में आपके अकाउंट में जमा रकम का 25% तक ही सीमित है।
लोन लेने का खर्च भी काफी कम है। इस पर ब्याज दर आमतौर पर मौजूदा PPF रेट से 1% ज्यादा होती है। फिलहाल PPF पर 7.1% ब्याज दर है, तो लोन पर आपको करीब 8.1% ब्याज देना होगा। यह उन लोगों के लिए एक सस्ता ऑप्शन है जो एलिजिबल (Eligible) हैं और जिन्हें ज्यादा पैसे की जरूरत नहीं है।
म्यूचुअल फंड पर लोन (LAMF) का ऑप्शन
म्यूचुअल फंड पर लोन, खासकर इक्विटी (Equity) या डेट (Debt) स्कीम्स में निवेश करने वालों के लिए एक ज्यादा फ्लेक्सिबल (Flexible) ऑप्शन है। यह सुविधा ओवरड्राफ्ट (Overdraft) अकाउंट की तरह काम करती है, यानी आपको कुल मंजूर लोन राशि पर नहीं, बल्कि सिर्फ इस्तेमाल की गई राशि पर ब्याज देना होता है।
कितना लोन मिल सकता है, यह लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो पर निर्भर करता है। यह बताता है कि बैंक आपके गिरवी रखे यूनिट्स की मौजूदा मार्केट वैल्यू के बदले कितना लोन देने को तैयार है। आमतौर पर, इक्विटी फंड्स के लिए 50% और डेट या लिक्विड फंड्स के लिए 70-80% तक लोन मिल सकता है। इस सुविधा के लिए ब्याज दरें आम तौर पर 9% से 12% सालाना के बीच होती हैं, जो PPF लोन से ज्यादा है।
खास बातें और रिस्क
सबसे बड़ा अंतर फ्लेक्सिबिलिटी और लोन की रकम में है। मान लीजिए, आपको तुरंत ₹4 लाख चाहिए। PPF लोन के 25% वाले नियम के चलते, आपके PPF अकाउंट में कम से कम ₹16 लाख होने चाहिए। वहीं, म्यूचुअल फंड लोन में, ज्यादा LTV रेशियो के कारण आपको इतने बड़े होल्डिंग (Holding) की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा, LAMF में आप मार्केट में निवेशित बने रहते हैं, जो लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है अगर पोर्टफोलियो अच्छा परफॉर्म करे।
लेकिन, LAMF में एक खास मार्केट रिस्क भी है, जिसे 'मार्जिन कॉल' (Margin Call) कहते हैं। चूंकि लोन मार्केट-लिंक्ड एसेट्स पर है, अगर म्यूचुअल फंड यूनिट्स की वैल्यू बहुत गिर जाती है, तो LTV रेशियो बैंक की लिमिट को पार कर सकता है। ऐसे में, बैंक आपसे और कोलैटरल (Collateral) मांग सकता है या लोन का कुछ हिस्सा तुरंत चुकाने को कह सकता है। PPF लोन में यह मार्केट-लिंक्ड रिस्क नहीं होता।
निवेशक क्या देखें?
फैसला लेने से पहले, निवेशकों को अपनी जरूरत की अर्जेंसी (Urgency) और रकम का अंदाज़ा लगाना चाहिए। अगर जरूरत छोटी और तय है, तो PPF लोन का कम ब्याज एक बेहतर विकल्प हो सकता है, बशर्ते आप एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया (Eligibility Criteria) पूरे करते हों। अगर बड़े या तुरंत पैसे चाहिए, तो म्यूचुअल फंड लोन ज्यादा प्रैक्टिकल (Practical) हो सकता है। निवेशकों को प्रोसेसिंग फीस (Processing Fees) और प्लेज क्रिएशन कॉस्ट (Pledge Creation Costs) जैसी अतिरिक्त शुल्कों की भी जांच करनी चाहिए, जो बैंक-आधारित लोन फैसिलिटी में आम हैं। हमेशा लेंडर (Lender) से मौजूदा LTV लिमिट्स और इंटरेस्ट स्ट्रक्चर (Interest Structure) की पुष्टि कर लें, क्योंकि ये अलग-अलग हो सकते हैं।
