नौकरी छूटना एक बड़ा झटका है, लेकिन तुरंत सही कदम उठाकर आप अपनी फाइनेंसियल हेल्थ और क्रेडिट स्कोर को बचा सकते हैं। ऐसे में लोन देने वालों से बात करना और अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी को सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है।
नौकरी चले जाने का मतलब सिर्फ सैलरी का रुकना नहीं है, बल्कि यह आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग के लिए एक बड़ा चैलेंज खड़ा कर देता है। ऐसे में आपको तुरंत अपने कर्जों, इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस पॉलिसीज़ के बारे में बड़े फैसले लेने पड़ते हैं। इन सबको सही तरीके से मैनेज करके ही आप लंबे समय में अपने फाइनेंस और क्रेडिट प्रोफाइल को नुकसान से बचा सकते हैं।
कर्ज़दारों (Lenders) से करें तुरंत बात
होम लोन हो या पर्सनल लोन, इनकम रुकने के बावजूद आपकी EMI की देनदारी बनी रहती है। यह याद रखना ज़रूरी है कि बैंक उन ग्राहकों के साथ मिलकर चलना पसंद करते हैं जो समय से पहले संपर्क करते हैं। अगर आप EMI मिस करने से पहले ही बैंक से बात करते हैं, तो आपको लोन री-स्ट्रक्चरिंग या पेमेंट डेफरमेंट (भुगतान में देरी) जैसे ऑप्शन मिल सकते हैं। बिना बताए पेमेंट में पीछे रहने से आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन लेना महंगा और मुश्किल हो जाएगा।
इमरजेंसी फंड और इन्वेस्टमेंट का संतुलन
इमरजेंसी फंड इसीलिए ही बनाया जाता है ताकि इनकम रुकने जैसे मुश्किल समय में काम आ सके। इस सेविंग का इस्तेमाल ज़रूरी खर्चों और EMI भरने में करने से आप लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को समय से पहले बेचने से बच सकते हैं। बाज़ार की गिरावट या फाइनेंशियल टेंशन के दौरान इन्वेस्टमेंट बेचने से आपको नुकसान हो सकता है और आपके रिटायरमेंट जैसे बड़े लक्ष्य भी पटरी से उतर सकते हैं। कैश बचाने के लिए SIPs को रोकना लुभावना लग सकता है, लेकिन नई नौकरी मिलने के बाद इन्वेस्टमेंट को फिर से शुरू करने की चुनौती को भी ध्यान में रखना होगा।
हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस को रखें सुरक्षित
नौकरी छूटने पर सबसे बड़े खतरों में से एक है कंपनी द्वारा दी जाने वाली इंश्योरेंस पॉलिसी का खत्म हो जाना। अक्सर एम्प्लॉयर-लिंक्ड हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज कर्मचारी के कंपनी छोड़ने के कुछ समय बाद ही खत्म हो जाता है। ऐसे में, अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाती है, तो आपको अपनी जेब से भारी खर्च करना पड़ सकता है, जिससे आपकी बची हुई सेविंग्स भी खत्म हो सकती हैं। यह ज़रूरी है कि आप चेक करें कि क्या आपकी मौजूदा पॉलिसी को इंडिविजुअल प्लान में बदला जा सकता है या एम्प्लॉयर इंश्योरेंस खत्म होने से पहले ही कोई नई इंडिपेंडेंट पॉलिसी ले लें। ऐसे अनिश्चित समय में अपने आश्रितों को सुरक्षित रखने के लिए लाइफ इंश्योरेंस कवरेज को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
घर के खर्चों की समीक्षा
अपने खर्चों पर फिर से कंट्रोल पाने के लिए बजट की पूरी तरह से समीक्षा करना पहला कदम है। ज़रूरी खर्चों और गैर-ज़रूरी खर्चों में फर्क करने से आपके पास बचे हुए कैश को बचाया जा सकता है। यह समय बिल्कुल भी नया कर्ज़ लेने या गैर-ज़रूरी खर्चे करने का नहीं है। फोकस सिर्फ कैपिटल को बचाए रखने पर होना चाहिए जब तक कि आपकी इनकम फिर से स्टेबल न हो जाए। इस स्थिति में किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसका इमरजेंसी फंड कितने समय तक चलेगा, जो यह तय करेगा कि आप अपने घरेलू बजट में कितनी जल्दी और कितनी बड़ा बदलाव लाएंगे।
