27 साल की उम्र में ₹1 करोड़ से रिटायरमेंट? जानिए क्या है हकीकत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
27 साल की उम्र में ₹1 करोड़ से रिटायरमेंट? जानिए क्या है हकीकत

एक 27 साल के टेक प्रोफेशनल की ₹1 करोड़ से जल्द रिटायरमेंट की प्लानिंग पर छिड़ी बहस। एक्सपर्ट्स का कहना है कि महंगाई और लाइफस्टाइल की बढ़ती लागत के चलते इतने सालों के लिए यह रकम काफी नहीं हो सकती।

जल्द रिटायरमेंट की राह में ₹1 करोड़ काफी हैं?

एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली' (FIRE) मूवमेंट को लेकर चर्चा आजकल खूब वायरल हो रही है। एक हाई-प्रेशर वाली टेक फर्म में काम करने वाले इस प्रोफेशनल ने हाल ही में ₹1 करोड़ की नेट वर्थ हासिल करने के बाद काम छोड़ने की अपनी मंशा जाहिर की थी। बर्नआउट (Burnout) और शांत जीवन की चाहत इसके पीछे की वजह बताई गई। लेकिन, उनकी इस प्लानिंग पर ज्यादातर लोगों ने चिंता जताई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 27 साल की उम्र में ₹1 करोड़ के सहारे पूरी तरह रिटायर होना कई बड़े फाइनेंशियल रिस्क (Financial Risks) को न्योता दे सकता है।

लंबी उम्र के लिए गणित

भले ही ₹1 करोड़ एक युवा के लिए बड़ी सेविंग हो, लेकिन लंबी अवधि की प्लानिंग में सबसे बड़ा सवाल है - कितने साल?

भारत में औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 70-80 साल से ज्यादा है। ऐसे में 27 साल के व्यक्ति को कम से कम 40 से 50 साल के खर्चों का इंतजाम करना होगा। अगर आज ₹1 करोड़ निकाले जाएं, तो महंगाई (Inflation) और अचानक आने वाली बड़ी मेडिकल इमरजेंसी जैसी समस्याएं इस रकम को उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी खत्म कर सकती हैं।

महंगाई और लाइफस्टाइल का बढ़ता खर्च

फाइनेंशियल प्लानर्स (Financial Planners) हमेशा कहते हैं कि महंगाई, छोटी रिटायरमेंट कॉर्पस (Retirement Corpus) का साइलेंट दुश्मन है। आज जो लाइफस्टाइल जितने में जी रहे हैं, 15-20 साल बाद उसका दोगुना या तिगुना खर्च हो सकता है।

जब आप रिटायर होते हैं, तो खाने, पेट्रोल या हेल्थकेयर जैसी बढ़ती कीमतों से लड़ने के लिए आपकी कोई एक्टिव इनकम (Active Income) नहीं होती। ₹1 करोड़ की सेविंग, चाहे वो म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) या फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposits) में ही क्यों न रखी हो, प्रिंसिपल अमाउंट (Principal Amount) को कम किए बिना लंबी अवधि में बढ़ती लागतों के साथ तालमेल बिठाने के लिए पर्याप्त इनकम जेनरेट करने में संघर्ष कर सकती है।

टोटल रिटायरमेंट के विकल्प

वर्कफोर्स से पूरी तरह बाहर निकलने के बजाय, बर्नआउट झेल रहे लोगों के लिए कई दूसरे रास्ते भी सुझाए जा रहे हैं। जैसे:

  • लंबी करियर ब्रेक (Sabbatical) लेना
  • कम तनाव वाली, बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस वाली जॉब में जाना
  • पार्ट-टाइम कंसल्टिंग (Part-time Consulting) की ओर शिफ्ट होना

ये विकल्प लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी से समझौता किए बिना राहत दे सकते हैं। कम तनाव वाले माहौल में काम जारी रखने से आप अपनी सेविंग्स में कंट्रीब्यूट करते रह सकते हैं, जिससे कंपाउंडिंग (Compounding) का फायदा और बढ़ेगा। इससे भविष्य के लिए काफी बड़ा कॉर्पस तैयार हो सकता है।

इन रिस्क पर रखें नजर

जो लोग अर्ली रिटायरमेंट (Early Retirement) पर विचार कर रहे हैं, उन्हें कुछ जरूरी रिस्क पर ध्यान देना चाहिए:

  • एम्प्लॉयर-प्रोवाइडेड हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) का न होना, जो उम्र बढ़ने के साथ महंगा होता जाता है।
  • अगर फाइनेंशियल कैलकुलेशन गलत साबित हुई तो लंबे गैप के बाद जॉब मार्केट में वापस लौटना मुश्किल हो सकता है।
  • शादी या डिपेंडेंट्स (Dependents) की जिम्मेदारी जैसी अनिश्चित लाइफ इवेंट्स, जिनसे खर्च का लेवल काफी बदल सकता है।

निष्कर्ष यह है कि ₹1 करोड़ का माइलस्टोन एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह इनकम-एर्निंग जर्नी के अंत के बजाय भविष्य की ग्रोथ के लिए एक मजबूत नींव के तौर पर ज्यादा बेहतर काम करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.