भारत में ₹20 लाख की सालाना कमाई करने वाले वेतनभोगी व्यक्तियों के सामने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ओल्ड टैक्स रिजीम और न्यू टैक्स रिजीम चुनने का विकल्प है। यह चुनाव उनकी अंतिम टैक्स देनदारी को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा, खासकर उपलब्ध कटौतियों (deductions) और छूटों (exemptions) के आधार पर।
ओल्ड टैक्स रिजीम के फायदे
ओल्ड टैक्स रिजीम में टैक्सपेयर्स स्टैंडर्ड डिडक्शन (₹50,000), सेक्शन 80C के तहत निवेश ( ₹1.5 लाख तक), हेल्थ इंश्योरेंस, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), और होम लोन के ब्याज जैसी कई कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं। ये कटौतियां टैक्सेबल इनकम को काफी कम कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, ₹20 लाख की ग्रॉस इनकम पर, इन कटौतियों के बाद टैक्सेबल इनकम घटकर लगभग ₹12.25 लाख रह सकती है, जिससे अनुमानित टैक्स देनदारी (सेस सहित) लगभग ₹1.87 लाख बनती है।
न्यू टैक्स रिजीम का गणित
वहीं, जो अब डिफॉल्ट रिजीम है, न्यू टैक्स रिजीम में कम टैक्स दरें हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000 का लाभ मिलता है, लेकिन यह सेक्शन 80C, HRA और होम लोन ब्याज जैसी अधिकांश प्रमुख कटौतियों को हटा देता है। ऐसे में, ₹20 लाख की ग्रॉस इनकम पर टैक्सेबल इनकम करीब ₹17.85 लाख तक रह सकती है। हालांकि, न्यू रिजीम की कम टैक्स दरों के कारण, अनुमानित टैक्स (सेस सहित) लगभग ₹1.63 लाख तक आ सकता है। यह उन लोगों के लिए आकर्षक है जो ज़्यादा कटौतियों का दावा नहीं करते।
सरकार क्यों चाहती है सरलता?
सरकार टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में बढ़ रही है ताकि अनुपालन (compliance) का बोझ कम हो और खर्च को बढ़ावा मिले। इसे टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने और लोगों के डिस्पोजेबल इनकम को बढ़ाने का एक तरीका माना जा रहा है। यह कदम GST के सरलीकरण जैसे व्यापक आर्थिक उपायों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य मांग को बढ़ाना है। यूनियन बजट 2026 ने भी इस फोकस को रेखांकित किया था।
न्यू रिजीम की कमियां
हालांकि, न्यू रिजीम टैक्स फाइलिंग को सरल बनाता है, लेकिन यह सेक्शन 80C और HRA जैसी लोकप्रिय कटौतियों को खत्म कर देता है। यह उन लोगों के लिए एक नुकसान है जो अपने फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए इन कटौतियों पर निर्भर करते हैं, खासकर घर खरीदने या होम लोन के भुगतान जैसी लागतों के लिए। सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के लिए ₹2 लाख तक होम लोन ब्याज की कटौती भी आमतौर पर न्यू रिजीम में उपलब्ध नहीं होती।
टैक्स चुनाव और भविष्य
सरकार का लक्ष्य एक पूर्वानुमेय टैक्स माहौल बनाना है जो आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे। नई आयकर अधिनियम, 2025 (Income Tax Act, 2025) का उद्देश्य स्पष्टता लाना और विवादों को कम करना है, जिससे स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित किया जा सके। टैक्सपेयर्स अभी भी अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार ओल्ड और न्यू रिजीम के बीच चयन कर सकते हैं। टैक्स दरों में बदलाव और इंफ्रास्ट्रक्चर में जारी निवेश के बीच सरकारी राजस्व पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
