शेयर बाजार के कमजोर रिटर्न से परेशान भारत के रईस निवेशक अब अपना पैसा ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) और विदेशी एसेट्स में लगा रहे हैं। मार्च 2026 तक AIF कमिटमेंट **₹16.94 लाख करोड़** तक पहुंच गया है, जो निवेश के बदलते ट्रेंड को दर्शाता है।
भारत के हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं क्योंकि Nifty 50 जैसे इंडेक्स के रिटर्न फिलहाल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे हैं। निवेशक अब प्राइवेट इक्विटी, प्राइवेट क्रेडिट और ओवरसीज एसेट्स की तरफ रुख कर रहे हैं।
AIF में भारी उछाल
ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) का क्रेज तेजी से बढ़ा है और इनका कुल कमिटमेंट 25.6% बढ़कर मार्च 2026 तक ₹16.94 लाख करोड़ हो गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कैटेगरी-II फंड्स का है, जिसमें प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट शामिल हैं। इनका योगदान ₹12.74 लाख करोड़ रहा है, जो 23.7% की ग्रोथ है। वहीं, कैटेगरी-III फंड्स में सबसे ज्यादा 36.9% की बढ़ोतरी देखी गई है। इन फंड्स में निवेश के लिए न्यूनतम ₹1 करोड़ का कमिटमेंट अनिवार्य है, जो इसे सिर्फ अमीरों के लिए सीमित रखता है।
लिक्विडिटी और रेगुलेटरी रिस्क
प्राइवेट मार्केट में निवेश का सबसे बड़ा चैलेंज लिक्विडिटी है। म्यूचुअल फंड्स या शेयरों के विपरीत, यहाँ आपका पैसा कई सालों के लिए लॉक हो जाता है। इसके अलावा, SEBI इन फंड्स को लेकर लगातार नियम सख्त कर रहा है ताकि पारदर्शिता और वैल्यूएशन में सुधार हो सके। निवेशकों को यह समझना होगा कि यहाँ टैक्स के नियम भी अलग हो सकते हैं।
ग्लोबल पोर्टफोलियो पर नजर
भारतीय निवेशक अब विदेशों में भी निवेश बढ़ा रहे हैं। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत निवेश के लिए आउटवर्ड रेमिटेंस $3.88 बिलियन तक पहुंच गया है। गिफ्ट सिटी, दुबई और सिंगापुर जैसे हब के जरिए अब ग्लोबल मार्केट तक पहुंच आसान हो गई है। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव और TCS के नियमों का ध्यान रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।
