Private Trusts: अमीरों की पहली पसंद बन रहे प्राइवेट ट्रस्ट, सक्सेशन प्लानिंग के लिए क्या है बड़ा दांव?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Private Trusts: अमीरों की पहली पसंद बन रहे प्राइवेट ट्रस्ट, सक्सेशन प्लानिंग के लिए क्या है बड़ा दांव?

भारत में अगले दशक में **$1.5 ट्रिलियन** की संपत्ति एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होने वाली है। इसके चलते रईस परिवार अब अपनी संपत्ति की सुरक्षा और उत्तराधिकार (Succession) के लिए प्राइवेट ट्रस्ट का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, ये टैक्स बचाने का जरिया नहीं, बल्कि एक गवर्नेंस टूल है, जिसमें कानूनी पेचीदगियां और भारी लागत भी जुड़ी है।

भारत में वेल्थ ट्रांसफर का एक ऐतिहासिक दौर चल रहा है, जहां आने वाले 10 वर्षों में लगभग $1.3 ट्रिलियन से $1.5 ट्रिलियन की संपत्ति का मालिकाना हक नई पीढ़ी के हाथों में जाएगा। इस बड़े बदलाव के बीच अब कारोबारियों और रईस परिवारों ने अनौपचारिक समझौतों को छोड़कर 'प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट' को अपनाना शुरू कर दिया है। यह कदम विशेष रूप से तब उठाया जा रहा है जब कंपनियां IPO लाने या इंस्टीट्यूशनल निवेश जुटाने की तैयारी कर रही हैं।

प्राइवेट ट्रस्ट के मायने

प्राइवेट ट्रस्ट एक औपचारिक गवर्नेंस स्ट्रक्चर है, जहां ट्रस्टी परिवार के सदस्यों के फायदे के लिए एसेट्स को संभालते हैं। बिजनेस मालिकों के लिए यह प्री-IPO प्लानिंग का एक बेहतरीन टूल है, जो बिजनेस के मालिकाना हक को सुरक्षित रखता है और उसे व्यक्तिगत या मैनेजमेंट से जुड़ी देनदारियों (Liabilities) से बचाता है।

लागत और खर्च

इसे अपनाना कोई सस्ता सौदा नहीं है। एक प्राइवेट ट्रस्ट को स्थापित करने में कानूनी फीस के तौर पर ₹2 लाख से ₹15 लाख तक का खर्च आ सकता है। इतना ही नहीं, अचल संपत्ति (immovable assets) के ट्रांसफर पर राज्य-दर-राज्य स्टैंप ड्यूटी लगती है, जो कई मामलों में संपत्ति के मूल्य का 7% तक हो सकती है।

टैक्स और कानून का पेच

Income-tax Act, 2025 के तहत ट्रस्ट का टैक्स स्ट्रक्चर काफी बदल चुका है। कई लोग इसे टैक्स बचाने का तरीका समझते हैं, जो एक बड़ी गलतफहमी है। 'डिस्क्रेशनरी ट्रस्ट' में आय का वितरण ट्रस्टी तय करता है और इन पर अक्सर मैक्सिमम मार्जिनल रेट से टैक्स लगता है। चूंकि भारत में अभी कोई प्रत्यक्ष इन्हेरिटेंस टैक्स (Inheritance Tax) नहीं है, इसलिए परिवार अक्सर ट्रस्ट के बजाय कैपिटल गेन्स टैक्स और भविष्य की संपत्तियों के प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

सावधानियां

ट्रस्ट बनाना महज पहला कदम है। इसे चलाने के लिए सालाना अकाउंटिंग, टैक्स फाइलिंग और स्वतंत्र ट्रस्टी की फीस का बजट भी रखना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर किसी के लिए ट्रस्ट जरूरी नहीं है। कई परिवारों के लिए एक अच्छी तरह से ड्राफ्ट की गई 'विल' (Will) और सही नॉमिनेशन भी पर्याप्त हो सकते हैं। निर्णय लेने से पहले अपने बिजनेस की जटिलता और संपत्ति की प्रकृति को समझना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.