रिटायरमेंट का नया मंत्र: वारिसों की नहीं, अब खुद के अनुभव पर खर्च करेंगे अमीर भारतीय!

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AuthorAditya Rao|Published at:
रिटायरमेंट का नया मंत्र: वारिसों की नहीं, अब खुद के अनुभव पर खर्च करेंगे अमीर भारतीय!
Overview

भारत में अमीर रिटायरमेंट के मायने बदल रहे हैं। पारंपरिक रूप से अपने वारिसों के लिए दौलत बचाने वाले धनी भारतीय अब खुद के अनुभव और जीवन की गुणवत्ता पर खुलकर खर्च कर रहे हैं। यह सांस्कृतिक बदलाव वेल्थ मैनेजरों की मदद से हो रहा है, जो उन्हें बेहतर फाइनेंशियल टूल का उपयोग करके अपनी संपत्ति को समझदारी से खर्च करने में सहायता कर रहे हैं।

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अमीर भारतीयों का बदलता रिटायरमेंट प्लान: क्यों अब 'Die with Zero' की ओर बढ़ रहे हैं?

भारत में हमेशा से यह माना जाता रहा है कि जीवन भर की कमाई अगली पीढ़ी के लिए बचा कर रखनी चाहिए। लेकिन अब धनी भारतीयों की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब वे अपने बच्चों के लिए बड़ी विरासत छोड़ने के बजाय, खुद की ख़ुशी, अनुभव और बेहतर लाइफस्टाइल पर ज़्यादा खर्च करना चाहते हैं।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

इस बड़े सांस्कृतिक और फाइनेंशियल बदलाव की कई वजहें हैं:

  • लंबी जीवन प्रत्याशा: भारत की औसत जीवन प्रत्याशा 70 साल पार कर चुकी है। इसका मतलब है कि लोग रिटायरमेंट के बाद 20 से 30 साल या उससे भी ज़्यादा जी सकते हैं। इस लंबी अवधि के लिए केवल बचत काफी नहीं है, बल्कि पैसे को समझदारी से खर्च करना ज़रूरी है।
  • बच्चों की आर्थिक स्वतंत्रता: आज की युवा पीढ़ी, चाहे वह ग्लोबल करियर में हो या अपने बिज़नेस में, काफ़ी हद तक आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुकी है। उन्हें अपने माता-पिता से विरासत मिलने पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है।
  • 'Die with Zero' का कॉन्सेप्ट: कई अमीर भारतीय अब 'Die with Zero' जैसे कॉन्सेप्ट को अपना रहे हैं, जो जीवनकाल में अनुभव पर अधिकतम खर्च करने की वकालत करता है, न कि संपत्ति पीछे छोड़ने की।

नए फाइनेंशियल टूल और स्ट्रैटेजी

इस 'बचत से ज़्यादा खर्च' (spend-over-save) वाली रणनीति को हकीकत बनाने के लिए, वेल्थ मैनेजर खास फाइनेंशियल प्लान तैयार कर रहे हैं। इसमें 'बकेट स्ट्रैटेजी' (Bucket Strategy) का इस्तेमाल होता है, जिसमें रिटायरमेंट फंड को अलग-अलग ज़रूरतों जैसे इनकम, हेल्थकेयर, लाइफस्टाइल और विरासत के लिए बांटा जाता है।

  • सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP): म्यूचुअल फंड से SWP, रेगुलर इनकम पाने का एक लोकप्रिय और टैक्स-कुशल तरीका बन गया है। जहां सीधा ब्याज मिलने पर 30% तक का टैक्स लग सकता है, वहीं SWP पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स 12.5% के आस-पास लगता है, जिससे काफ़ी बचत होती है।
  • हेल्थ इंश्योरेंस: मेडिकल इन्फ्लेशन (जो अक्सर 12-15% सालाना होता है) को देखते हुए, ₹1 करोड़ या उससे ज़्यादा की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की सलाह दी जा रही है।
  • रिवर्स मॉर्गेज: घर की वैल्यू का इस्तेमाल लाइफस्टाइल के लिए करने के लिए रिवर्स मॉर्गेज (Reverse Mortgages) जैसे विकल्प भी धीरे-धीरे ज़्यादा लोगों तक पहुँच रहे हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट का बढ़ता सेक्टर

भारत का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहा है, और इसके 15% सीएजीआर (CAGR) की दर से बढ़ने का अनुमान है। Motilal Oswal और Axis Bank जैसी बड़ी फ़ाइनेंशियल कंपनियां इस सेक्टर में विस्तार कर रही हैं।

जोखिमों का प्रबंधन

हालांकि, इस नई सोच में कुछ जोखिम भी हैं। सबसे बड़ा है लंबी उम्र का जोखिम (longevity risk) - यानी बचत ख़त्म होने से पहले ही लंबी उम्र का निकल जाना। महंगाई (inflation) भी समय के साथ पैसों की खरीद शक्ति (purchasing power) को कम कर सकती है। इसलिए, 4 percent rule जैसे गाइडलाइन्स को महंगाई के हिसाब से एडजस्ट करना ज़रूरी है। हर किसी के रिटायरमेंट के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता अलग होती है, ऐसे में एक्सपर्ट की सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.