Unclaimed Assets: भारत में ₹1.1 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम लावारिस, क्या आपका पैसा तो नहीं फंसा?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Unclaimed Assets: भारत में ₹1.1 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम लावारिस, क्या आपका पैसा तो नहीं फंसा?

देशभर के बैंकों, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों में लावारिस पड़ी कुल संपत्ति **₹1.1 लाख करोड़** के आंकड़े को पार कर गई है। इसमें IEPF के पास पड़े शेयरों की वैल्यू शामिल नहीं है। तमाम डिजिटल कोशिशों के बावजूद निष्क्रिय (Dormant) अकाउंट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

भारत में लावारिस वित्तीय संपत्तियों का आंकड़ा ₹1.1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। यह उन परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो अपने अपनों की छोड़ी हुई बचत को फिर से हासिल करना चाहते हैं। इस आंकड़े में बैंक, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और सरकारी फंड्स शामिल हैं। गौरतलब है कि इसमें ₹65,600 करोड़ की उस वैल्यू को नहीं जोड़ा गया है, जो साल 2023 के अंत तक Investor Education and Protection Fund (IEPF) में ट्रांसफर किए गए शेयरों की है।

बढ़ते 'डोरमेंट' अकाउंट्स

ज्यादातर लावारिस पैसा उन बैंक खातों में है जो एक दशक से अधिक समय से इनएक्टिव हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डेटा के मुताबिक, अनक्लेम्ड बैंक डिपॉजिट मार्च 2025 में करीब ₹74,600 करोड़ थे, जो फरवरी 2026 तक बढ़कर लगभग ₹83,000 करोड़ हो गए। इसका मतलब साफ है कि पुराने दावों के निपटारे के मुकाबले नए डोरमेंट अकाउंट्स कहीं ज्यादा तेजी से जुड़ रहे हैं।

रिकवरी की पेचीदगियां

परिवारों के लिए इन पैसों को वापस पाना एक जटिल प्रक्रिया है। सिस्टम का बिखराव (Fragmentation) इसकी सबसे बड़ी वजह है, जहां अलग-अलग प्रोडक्ट्स के लिए अलग-अलग नियम और डेडलाइन हैं। अगर अकाउंट होल्डर ने नॉमिनेशन नहीं किया है या KYC पुरानी हो चुकी है, तो कानूनी उत्तराधिकारियों को एक लंबी और कागजी लड़ाई से गुजरना पड़ता है।

सरकारी कोशिशें और डिजिटल समाधान

सरकार और रेगुलेटर्स ने इस समस्या को सुलझाने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। Banking Laws (Amendment) Act, 2025 के तहत अब बैंक अकाउंट्स में मल्टीपल नॉमिनी जोड़ने की सुविधा दी गई है। डिजिटल तौर पर मदद के लिए सरकार ने UDGAM पोर्टल (बैंकों के लिए), IRDAI का Bima Bharosa और SEBI का MITRA प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। 2026 में आए एक कॉमन सर्च पोर्टल ने भी खोजबीन को आसान बनाया है, लेकिन सेटलमेंट के लिए अभी भी आपको संबंधित संस्थान की प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.