AI स्कैम का खतरा बढ़ा! SEBI ने कसे शिकंजे, निवेशकों के लिए जारी की चेतावनी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
AI स्कैम का खतरा बढ़ा! SEBI ने कसे शिकंजे, निवेशकों के लिए जारी की चेतावनी
Overview

भारत में वित्तीय स्कैम (Financial Scams) अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और खतरनाक हो गए हैं। ये स्कैमर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक और साइकोलॉजी का इस्तेमाल करके निवेशकों को धोखा दे रहे हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) नियमों को कड़ा कर रहा है और जनता को जागरूक कर रहा है, लेकिन नए धोखेबाजी के तरीकों और सुरक्षा उपायों के बीच अभी भी एक अंतर बना हुआ है।

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AI और नई तकनीक से हो रहे हैं स्कैम

धोखाधड़ी करने वाले अब निवेशकों को ठगने के लिए AI और एडवांस टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। AI से चलने वाले स्कैम, जैसे डीपफेक वीडियो और आवाज़ की नकल (Voice Cloning), भरोसेमंद लोगों का रूप धारण कर खुद को वैध दिखाते हैं। ये तरीके वेरिफिकेशन सिस्टम को भी चकमा दे रहे हैं और बेहद विश्वसनीय भ्रम पैदा कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024-25 में AI-आधारित स्कैम से भारत में ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' भी एक बड़ी चिंता का विषय है, अकेले एक साल में भारत में 1,00,000 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनकी शुरुआत अक्सर विदेश से होती है। स्कैमर्स व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे प्लेटफॉर्म पर भारी, गारंटीड रिटर्न (Guaranteed Returns) का वादा करने वाले मैसेज भेजते हैं। कुछ स्कैम तो सिर्फ पांच मिनट में लोगों को फंसा सकते हैं।

डर और लालच का फायदा उठाते हैं स्कैमर्स

टेक्नोलॉजी के अलावा, स्कैमर्स इंसानी मनोविज्ञान का भी बखूबी फायदा उठाते हैं। "गारंटीड रिटर्न" और बहुत ज्यादा मुनाफे, जैसे तुरंत 100% कमाने का वादा, लोगों को फंसाने वाले बड़े रेड फ्लैग (Red Flags) हैं। स्कैमर्स शुरू में छोटे-छोटे नकली मुनाफे दिखाकर या छोटी निकासी (Withdrawals) की इजाजत देकर भरोसा पैदा करते हैं। बड़ा निवेश मांगने से पहले वे ऐसा माहौल बनाते हैं। वे दबाव बनाने, झूठे प्रशंसापत्र (Fake Testimonials) और तात्कालिकता ("ऑफर आज खत्म") का इस्तेमाल करके जल्दबाजी में फैसले लेने पर मजबूर करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लालच और भरोसा स्कैम के मुख्य ट्रिगर (Triggers) हैं। स्कैमर्स पैसा लेकर गायब होने से पहले विश्वसनीयता बनाते हैं। यहां तक कि पढ़े-लिखे लोग भी इन स्कैम का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि ये स्कैम भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करते हैं और तार्किक सोच (Logical Thought) को दरकिनार कर देते हैं।

SEBI के प्रयासों के सामने चुनौतियां

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) निवेशकों की सुरक्षा के लिए SCORES जैसे सिस्टम और म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) व फिनटेक (Fintech) कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाकर काम कर रहा है। निवेशक शिक्षा (Investor Education) लोगों को जोखिम पहचानने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण है। SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार (RIAs) को ग्राहकों के सर्वोत्तम हित में काम करना होता है और उन्हें फी-ओनली मॉडल (Fee-Only Model) का पालन करना होता है। हालांकि, इन प्रयासों में कई बाधाएं हैं। अप्रैल 2026 तक RIAs की संख्या 1,000 से नीचे चली गई है, जिससे सलाह देने के क्षेत्र में एक बड़ी कमी आई है। इसके चलते अनपंजीकृत 'फिनफ्लुएंसर' (Finfluencers) पर निर्भरता बढ़ रही है, जो अक्सर बिना किसी निगरानी के काम करते हैं और अपनी राय को विशेषज्ञता के तौर पर देते हैं। करीब 62% संभावित निवेशक इन अनियंत्रित आवाजों से प्रभावित होते हैं। टेक्नोलॉजी का विकास भी नियमों से तेज़ी से हो रहा है, जिससे स्कैम के लिए कमियां (Loopholes) पैदा हो रही हैं।

बढ़ता खतरा सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है

स्कैम की बढ़ती जटिलता भारत की वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है। SEBI और अन्य एजेंसियां धोखाधड़ी से लड़ रही हैं, लेकिन योजनाओं की विशाल संख्या और बदलती प्रकृति कमजोरियां पैदा करती हैं। 2019 के बाद से डीपफेक धोखाधड़ी में 550% की वृद्धि हुई है, और 2024 तक इसके ₹70,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। शिक्षा के प्रयासों के बावजूद, करीब 51% भारतीयों ने ऑनलाइन स्कैम में पैसे गंवाए हैं, औसतन हर व्यक्ति ₹93,195 का नुकसान हुआ है। कई निवेशक अनपंजीकृत सलाहकारों से भ्रामक सलाह के शिकार होते हैं, जिनके पास कोई समाधान नहीं होता। नियमन जटिल, मल्टी-चैनल योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं जो मनोविज्ञान का फायदा उठाती हैं। अकेले डीपफेक मुद्दे ने 47% भारतीय वयस्कों को प्रभावित किया है, जिससे मीडिया में भरोसे पर असर पड़ा है। यह टेक्नोलॉजी की दौड़ और मानवीय कमजोरी का मतलब है कि होशियार लोग भी मूर्ख बन सकते हैं, जो आधुनिक वित्तीय अपराधों से बचाव की एक कमजोरी को दर्शाता है।

सुरक्षित कैसे रहें?

एडवांस्ड वित्तीय धोखाधड़ी से लड़ने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता है। नियमों को AI जैसी नई टेक्नोलॉजी के अनुकूल लगातार बनते रहना चाहिए। निवेशक शिक्षा को हेरफेर (Manipulation) के खिलाफ आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और लचीलापन (Resilience) बनाने की आवश्यकता है। निवेशकों को अपना खुद का रिसर्च (Research) करना चाहिए, सलाहकारों का रजिस्ट्रेशन (Registration) चेक करना चाहिए और पंजीकृत माध्यमों (Regulated Channels) पर टिके रहना चाहिए। चुनौती बढ़ रही है, इसलिए निरंतर सतर्कता और सुरक्षा उपायों (Safeguards) का पालन करना ही विकसित हो रहे खतरों के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.