NRI Tax Rules: भारत लौटे प्रोफेशनल्स पर टैक्स का शिकंजा कसने की तैयारी, बढ़ेंगी मुश्किलें

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
NRI Tax Rules: भारत लौटे प्रोफेशनल्स पर टैक्स का शिकंजा कसने की तैयारी, बढ़ेंगी मुश्किलें
Overview

भारत सरकार द्वारा प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए कर (Tax) नियमों में कड़े बदलाव किए जा रहे हैं। जो NRI भारत लौट रहे हैं, उन्हें अब रेसिडेंशियल स्टेटस तय करने के नए नियमों, अपनी विदेशी संपत्तियों (Foreign Assets) के विस्तृत खुलासे और फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम की जटिलताओं को लेकर कड़ी अनुपालन (Compliance) की जरूरत होगी।

टैक्स नियमों का सख्त होना

भारत में लौटने वाले NRIs के लिए टैक्स का दायरा और सख्त होता जा रहा है। अब यह तय करना कि कौन व्यक्ति भारत में टैक्स के लिहाज से निवासी (Resident) है या नहीं, इसमें खास ध्यान रखना होगा। नए नियमों के तहत, यदि कोई व्यक्ति वित्तीय वर्ष में 182 दिन से अधिक भारत में रहता है, तो उसे निवासी माना जाएगा।

लेकिन, उच्च आय वाले या भारतीय मूल के लोगों के लिए, यह अवधि कुछ खास आय शर्तों के तहत 120 दिनों तक घटाई जा सकती है। इसका सीधा मतलब है कि ऐसे व्यक्ति टैक्स के उद्देश्य से भारत के निवासी बन सकते हैं। इससे उनकी वैश्विक आय (Global Income) पर भारत में टैक्स लग सकता है, जो पहले केवल भारत में अर्जित आय पर लगता था।

इसके अलावा, 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले 'डीम्ड रेजिडेंसी' (Deemed Residency) नियम उन लोगों को भी निवासी बना सकते हैं जिनकी भारत से मजबूत आर्थिक जड़ें हैं, भले ही वे टैक्स-फ्री देशों में रहते हों।

साथ ही, इनकम टैक्स रिटर्न के Schedule FA के तहत विदेशी संपत्तियों और आय का खुलासा करना अब अनिवार्य है, भले ही आप वर्ष के कुछ ही हिस्से के निवासी हों। ऐसा न करने पर 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत भारी पेनाल्टी लग सकती है।

विदेशी आय और संपत्तियों का लेखा-जोखा

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लौटने वाले NRIs अपनी वैश्विक आय और संपत्तियों का पूरा हिसाब दें। पहले के NRE (नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल) और FCNR (फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट) खातों को भी FEMA नियमों के तहत निवासी खातों में बदलना होगा, ताकि टैक्स छूट बनी रहे।

आर्थिक गणित और FTC का पेच

इन सख्त नियमों का असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश (Capital Inflows) पर भी पड़ सकता है। हालांकि सरकार का लक्ष्य कर अनुपालन बढ़ाना है, लेकिन NRIs पर बढ़ा अनुपालन का बोझ उन्हें धन वापस लाने या निवेश करने से हतोत्साहित कर सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, विदेशों से भेजा गया धन (Remittances) और NRI निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा रहे हैं। लेकिन, अगर उन्हें टैक्स को लेकर ज्यादा दिक्कतें महसूस हुईं, तो यह प्रवाह धीमा पड़ सकता है।

डबल टैक्सेशन (Double Taxation) से बचने के लिए फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम करने की प्रक्रिया भी जटिल हो सकती है। इसके लिए सटीक दस्तावेज और Form 67 जैसे विशिष्ट फॉर्म का पालन करना जरूरी है। विभिन्न देशों के साथ डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट्स (DTAAs) का लाभ उठाने के लिए भी सावधानीपूर्वक योजना बनानी होगी।

अनुपालन का बोझ और समाधान

इन नियमों को समझने और पालन करने के लिए NRIs को सक्रिय रहना होगा। उन्हें अपने भारत में बिताए दिनों की गिनती पर विशेष ध्यान देना होगा। खासकर, संक्रमण काल (Transition Year) में जब उनका स्टेटस नॉन-रेजिडेंट से Resident but Not Ordinarily Resident (RNOR) और फिर Resident and Ordinarily Resident (ROR) में बदल सकता है।

RNOR स्टेटस एक सीमित समय के लिए कुछ फायदे देता है, जिसमें सिर्फ भारत में अर्जित आय पर टैक्स लगता है। विदेशी आय को भारतीय रुपये में बदलते समय सही मुद्रा रूपांतरण (Currency Conversion) और समय पर FTC क्लेम करना डबल टैक्सेशन से बचने के लिए महत्वपूर्ण है।

भविष्य की ओर:

हाल के बजट प्रस्तावों में कुछ राहतें भी दी गई हैं, जैसे कुछ गैर-निवासी विशेषज्ञों के लिए 5 साल तक वैश्विक आय पर टैक्स छूट और अघोषित विदेशी संपत्तियों के लिए एक बार खुलासा करने का मौका। ये कदम कर निश्चितता प्रदान करने और अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।

कुल मिलाकर, भारत सरकार कर आधार को मजबूत करने और अपने प्रवासी नागरिकों से अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में बढ़ रही है। भविष्य में, नियमों को स्पष्ट करने और लागू करने में आसानी पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, ताकि भारत वैश्विक प्रतिभा और पूंजी के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बना रहे।

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