भारत की Gen Z पीढ़ी सही फाइनेंशियल एडवाइस चुनने में संघर्ष कर रही है। एक ताजा SEBI सर्वे के मुताबिक, **60%** युवा सोशल सर्कल और इन्फ्लुएंसर्स पर निर्भर हैं, जबकि **93%** लोग उन्हें विश्वसनीय मानते हैं। इसके चलते **54%** युवा अपने महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्यों में देरी कर रहे हैं।
भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में निवेश करना आज के समय में बेहद आसान हो गया है, लेकिन इसी आसानी ने नई पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। SIP, स्टॉक बाइंग ऐप्स और ETF जैसे आधुनिक टूल्स के दौर में Gen Z के लिए प्रोफेशनल सलाह और वायरल कंटेंट के बीच फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है।
SEBI का सर्वे और भरोसे का संकट
SEBI के 2025 के इन्वेस्टर सर्वे के अनुसार, 93% युवा इन्फ्लुएंसर्स की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। यह चिंताजनक है क्योंकि कई कंटेंट क्रिएटर्स के पास न तो कोई औपचारिक वित्तीय योग्यता होती है और न ही वे किसी रेगुलेटरी स्टैंडर्ड के प्रति जवाबदेह होते हैं। अक्सर, सोशल मीडिया पर दिखने वाली लोकप्रियता को युवा निवेशक बाजार की समझ मान लेते हैं, जिससे उनके पोर्टफोलियो पर बुरा असर पड़ सकता है।
पारंपरिक ज्ञान से डिजिटल शोर की ओर
पहले के समय में घर के बड़े-बुजुर्ग निवेश के फैसले लेते थे, लेकिन आज का कॉम्प्लेक्स मार्केट तेजी से बदल रहा है। इंटरनेशनल फंड्स और क्रेडिट-बेस्ड डिजिटल ऐप्स जैसे उत्पादों के बारे में पुराने लोगों के पास अनुभव की कमी है। इसी कमी को पूरा करने के लिए युवा एल्गोरिदम और सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं, जो अक्सर एक जैसा (Generalized) सुझाव देते हैं, जबकि हर व्यक्ति की रिस्क कैपेसिटी और लोन प्रोफाइल अलग होती है।
जीवन के बड़े फैसलों पर असर
2026 के आंकड़ों के मुताबिक, आधे से ज्यादा युवा पेशेवर घर खरीदने या परिवार के बड़े खर्चों जैसे जीवन के मील के पत्थरों को टाल रहे हैं। इसका मुख्य कारण वित्तीय अस्थिरता है। अक्सर 'हर्ड मेंटालिटी' यानी भेड़चाल में फंसकर, बिना जोखिम को समझे युवा गलत निवेश कर बैठते हैं, जिससे उनकी पूंजी को नुकसान होता है।
अपनी सूझबूझ कैसे बढ़ाएं?
रेगुलेटर्स अब लगातार फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका पर नजर रख रहे हैं ताकि छोटे निवेशकों को बचाया जा सके। निवेश करते समय यह समझना जरूरी है कि सलाह देने वाले का एजेंडा क्या है। निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि आप वायरल टिप्स के बजाय आधिकारिक डिस्क्लोजर और कंपनी की रिसर्च रिपोर्ट्स को प्राथमिकता दें। अपनी कमाई और कर्ज को ध्यान में रखकर फैसला लेना ही लंबे समय में वेल्थ बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
